रुद्रपुर: आगामी त्योहारी सीजन और देश के प्रमुख महानगरों से बढ़ती मांग के चलते रुद्रपुर सिडकुल की एफएमसीजी (FMCG) और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों ने उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। उद्योगों के अनुसार, रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं के उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कई कंपनियों ने अतिरिक्त शिफ्ट शुरू कर दी हैं और कुछ इकाइयां 24 घंटे संचालन कर रही हैं।

सिडकुल के आंकड़ों के मुताबिक, मई से जुलाई के बीच एफएमसीजी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। बिस्किट, साबुन, टूथपेस्ट, हेल्थ ड्रिंक और पैकेज्ड फूड बनाने वाली कंपनियों ने उत्पादन लक्ष्य पूरा करने के लिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग और पैकिंग क्षमता बढ़ा दी है।
मेट्रो शहरों से ऑर्डर में 35–40% की बढ़ोतरी
उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर और मुंबई सहित अन्य महानगरों के डिस्ट्रीब्यूटरों से ऑर्डर में 35 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। आगामी दीपावली, करवा चौथ और विवाह सीजन को देखते हुए कंपनियां पहले से ही अतिरिक्त स्टॉक तैयार कर रही हैं, ताकि बाजार की मांग समय पर पूरी की जा सके।
24 घंटे चल रही हैं कई उत्पादन इकाइयां
बढ़ती मांग के चलते कई बड़ी कंपनियों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग और पैकिंग लाइनों पर तीसरी शिफ्ट शुरू कर दी है। कई औद्योगिक इकाइयां अब 24 घंटे संचालित हो रही हैं।
एक कंपनी के प्लांट हेड ने बताया कि उनकी इकाई का दैनिक उत्पादन 80 टन से बढ़कर 112 टन हो गया है। साथ ही पैकिंग सेक्शन में 400 अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती की गई है, जिससे स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिले हैं।
बेहतर कनेक्टिविटी का मिल रहा लाभ
उद्योग जगत का मानना है कि रुद्रपुर की दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी और बेहतर सड़क संपर्क के कारण यहां निर्मित उत्पाद 48 घंटे के भीतर प्रमुख महानगरों तक पहुंच रहे हैं। इससे कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई है और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हो रही है।
वर्तमान में सबसे अधिक मांग बिस्किट, नमकीन, साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और हेल्थ ड्रिंक जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों की बनी हुई है।
सिडकुल एसोसिएशन ने क्या कहा?
सिडकुल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने कहा कि रुद्रपुर सिडकुल की कई कंपनियां रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करती हैं। बाहरी राज्यों से लगातार बढ़ती मांग के कारण उद्योगों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार पर भी देखने को मिल रहा है।