टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने योजना को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब विकास को केवल झील क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय इसके आसपास के करीब 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल करते हुए समग्र मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने पर्यटन विभाग के साथ बैठक के दौरान अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रस्तावित योजना का उद्देश्य टिहरी झील और आसपास के क्षेत्रों में होने वाले अनियोजित विकास को नियंत्रित करते हुए पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित और दीर्घकालिक तरीके से विकसित करना है।
सरकारी और निजी भूमि को भी योजना में किया जाएगा शामिल
प्रस्तावित मास्टर प्लान में सरकारी भूमि के साथ निजी भूमि को भी शामिल किए जाने की योजना है। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, उपयोगिता और संभावनाओं के आधार पर अलग-अलग जोन निर्धारित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव ने योजना तैयार करते समय सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें स्थानीय जरूरतों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता, भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है।
वाटर स्पोर्ट्स के साथ एडवेंचर और विलेज टूरिज्म पर फोकस
टिहरी झील को ऐसा पर्यटन केंद्र बनाने की योजना है, जहां पर्यटक केवल कुछ घंटे बिताकर वापस न लौटें, बल्कि एक या दो दिन अथवा उससे अधिक समय तक ठहर सकें।
इसके लिए झील और आसपास के क्षेत्र में अलग-अलग मैगनेट एरिया विकसित करने की योजना है। पर्यटन गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। इनमें:
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वाटर स्पोर्ट्स
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एडवेंचर टूरिज्म
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ट्रैकिंग
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नेचर टूरिज्म
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कल्चरल टूरिज्म
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विलेज टूरिज्म
को एकीकृत रूप से विकसित करने पर जोर रहेगा।
अप्रैल से जून तक पर्यटन गतिविधियां जारी रखने की तैयारी
टिहरी झील में जलस्तर का उतार-चढ़ाव पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए चुनौती माना जाता है। विशेष रूप से अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम होने की स्थिति में पर्यटन गतिविधियों को जारी रखने के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इसके लिए मौसम और जलस्तर के आधार पर सालभर का टूरिज्म कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग मौसम में पर्यटकों के लिए उपयुक्त गतिविधियां उपलब्ध कराना है।
आसपास के गांवों को भी पर्यटन से जोड़ने की योजना
मास्टर प्लान में टिहरी झील के आसपास बसे गांवों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत नए ट्रैकिंग रूट और ट्रेल्स विकसित किए जाने की योजना है।
गांवों में विलेज और कल्चरल विजिट को बढ़ावा देकर पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित कराने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य है।
SPA दिल्ली और भोपाल से लिया जा सकता है तकनीकी सहयोग
मास्टर प्लान तैयार करने के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA), दिल्ली और SPA भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
सरकार का फोकस टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र के विकास को एक समग्र योजना के तहत आगे बढ़ाने पर है, ताकि पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन कायम किया जा सके।
प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाएगा प्रस्ताव
मुख्य सचिव ने टिहरी झील को ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्तावित पर्यटन गतिविधियों और समग्र कार्ययोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
योजना के अनुसार, तैयार प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। आगामी बैठक में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद झील क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समन्वित तरीके से आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सिर्फ झील नहीं, पूरे क्षेत्र को पर्यटन हब बनाने की तैयारी
टिहरी झील के विकास की प्रस्तावित योजना को केवल वाटर स्पोर्ट्स तक सीमित नहीं रखा जाएगा। झील, पहाड़, गांव, स्थानीय संस्कृति, ट्रैकिंग और एडवेंचर गतिविधियों को एक साथ जोड़कर क्षेत्र को लंबे समय तक पर्यटकों को ठहरने के लिए आकर्षित करने वाले पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
हालांकि, मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार होने के बाद ही प्रस्तावित गतिविधियों, उनके स्थान और क्रियान्वयन की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट होगी।