देहरादून: उत्तराखंड में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने से बिजली संकट की स्थिति बनी हुई है। जल स्तर कम होने के कारण राज्य के जलविद्युत उत्पादन में गिरावट आई है। वहीं, केंद्रीय पूल से अपेक्षाकृत कम बिजली मिलने के चलते यूपीसीएल के सामने बढ़ती मांग पूरी करना चुनौती बन गया है।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीक डिमांड के समय खुले बाजार में 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

केंद्र से गैर-आवंटित कोटे से बिजली की मांग
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने बृहस्पतिवार को प्रेस वार्ता में बिजली की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को गैर-आवंटित कोटे से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में बिजली की कमी का असर देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद उत्तराखंड में फिलहाल अन्य परिस्थितियों की तुलना में कम बिजली कटौती की जा रही है।
गैस आधारित पावर प्लांट भी चलाया गया
बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रदेश में गैस आधारित पावर प्लांट का भी संचालन किया गया है। हालांकि, प्लांट के पास फिलहाल करीब पांच दिन का गैस बैकअप उपलब्ध बताया गया है।
यूपीसीएल के सामने बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। खासतौर पर पीक आवर्स में मांग बढ़ने के कारण अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ रही है।
बिजली चोरी वाले क्षेत्रों में कटौती को प्राथमिकता
यूपीसीएल के एमडी ने बताया कि बिजली कटौती की स्थिति में प्राथमिकता तय की जा रही है। बिजली चोरी वाले क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार कटौती की जा रही है, ताकि उपलब्ध बिजली का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि बिजली लाइनों और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े आवश्यक रखरखाव के कार्य रोस्टिंग के दौरान ही किए जाएं, ताकि सामान्य समय में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो।
सौर ऊर्जा से मिल सकता है हाइड्रो पावर का बैकअप
बिजली संकट के बीच यूपीसीएल ने जलविद्युत उत्पादन के बेहतर प्रबंधन की योजना भी बनाई है। इसके तहत यूजेवीएनएल से अनुरोध किया गया है कि जब सौर ऊर्जा उपलब्ध हो, उस दौरान हाइड्रो पावर को बैकअप के तौर पर रखा जाए।
यूपीसीएल के अनुसार, इस व्यवस्था से करीब 2 घंटे 30 मिनट तक का बैकअप उपलब्ध हो सकता है। इससे पीक समय में बिजली आपूर्ति बनाए रखने और कटौती को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्माण और अंडरग्राउंड केबलिंग के काम भी जारी
प्रदेश में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्माण कार्य और अंडरग्राउंड केबलिंग के प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। यूपीसीएल का कहना है कि मौजूदा बिजली संकट के बीच आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है।
फिलहाल जलविद्युत उत्पादन में कमी, केंद्रीय पूल से सीमित उपलब्धता और बाजार में महंगी बिजली के कारण प्रदेश में बिजली प्रबंधन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।