

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के कुछ पदाधिकारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित मिलीभगत से फर्जी नामों, वाहन स्वामियों के नाम पर तैयार दस्तावेजों और संदिग्ध भुगतान प्रविष्टियों के जरिए कंपनी की धनराशि का दुरुपयोग किया। मामले में पूर्व अध्यक्ष, तत्कालीन महाप्रबंधक, सहायक लेखाधिकारी, लेखा लिपिक, कैशियर और स्टेशन इंचार्ज की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
एडवांस, डीजल फंड और मरम्मत के नाम पर भुगतान में गड़बड़ी का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि वाहन स्वामियों के एडवांस, डीजल फंड, दान, मरम्मत, वेतन और ट्रैफिक व्यवस्था के नाम पर 1.25 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतानों में कथित फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि मृत वाहन स्वामियों के नाम पर फर्जी प्रार्थना पत्र और वाउचर तैयार कर कैशियर अनुभाग से धनराशि निकाली गई। इसके अतिरिक्त ऐसे कर्मचारियों के नामों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है, जो संबंधित स्थानों पर कभी कार्यरत नहीं रहे थे।
उपलब्ध विवरण में वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान करीब 1.81 करोड़ रुपये की अनियमितता का उल्लेख है, जबकि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 3.85 करोड़ रुपये के कथित गबन का भी जिक्र किया गया है। इन आंकड़ों के बीच संबंध और कुल कथित वित्तीय नुकसान की स्थिति आधिकारिक जांच के आधार पर स्पष्ट होना आवश्यक है।
जीएमओयू में यह मामला मार्च 2025 में सामने आए कथित घोटाले के बाद एक और गंभीर प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले कंपनी की जमीन को खुर्दबुर्द किए जाने के मामले में भी जांच के बाद कोटद्वार कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई थी।
कोटद्वार में 85 लाख रुपये की भूमि धोखाधड़ी का मामला, दो भाइयों पर प्राथमिकी
कोटद्वार। तहसील क्षेत्र में करीब 85 लाख रुपये की कथित भूमि धोखाधड़ी का एक अन्य मामला सामने आया है। पदमपुर सुखरो में लगभग 14 बीघा भूमिधरी भूमि के सौदे को लेकर प्रदीप कुमार की शिकायत पर पुलिस ने दो भाइयों, लेखराज और गोविंद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रदीप कुमार के अनुसार, उन्होंने दोनों भाइयों से उक्त भूमि खरीदने के लिए इकरारनामा किया था और इसके एवज में 85 लाख रुपये का भुगतान किया था। समझौते के मुताबिक, आरोपियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत भूमि का पंजीकृत बैनामा प्रदीप कुमार अथवा उनके नामित व्यक्ति के पक्ष में करना था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैनामा कराने के लिए कहने पर दोनों भाई लगातार टालमटोल करते रहे और बाद में पंजीकृत बैनामा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोपियों पर गाली-गलौज करने, जान से मारने की धमकी देने और इकरारनामे के गवाहों को डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए हैं।
प्रदीप कुमार ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर कोटद्वार कोतवाली पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।