देहरादून: उत्तराखंड में पंचायतों के रिक्त पदों को भरने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग के अनुसार, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य के कुल 3,922 रिक्त पदों पर उपचुनाव कराया जाएगा। इन पदों के लिए 12 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 14 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
![]()
चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी कराने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
ग्राम पंचायत सदस्य के सबसे अधिक पद रिक्त
आयोग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कुल 3,922 पदों में:
-
ग्राम पंचायत सदस्य: 3,890 पद
-
ग्राम प्रधान: 23 पद
-
क्षेत्र पंचायत सदस्य: 9 पद
इन सभी पदों पर उपचुनाव कराया जाएगा।
26 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू
उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 26 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है। उम्मीदवार निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संबंधित निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
चुनाव कार्यक्रम के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
-
नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि: 30 सितंबर और 1 अक्टूबर, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
-
नामांकन पत्रों की जांच: 3 अक्टूबर
-
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 4 अक्टूबर
-
चुनाव चिह्न आवंटन: 5 अक्टूबर
-
मतदान: 12 अक्टूबर
-
मतगणना और परिणाम घोषणा: 14 अक्टूबर
12 जिलों में होंगे पंचायत उपचुनाव
हरिद्वार जिले को छोड़कर उत्तराखंड के अन्य 12 जिलों में वर्ष 2025 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए थे। इसके बाद विभिन्न कारणों से कई पद रिक्त रह गए या बाद में खाली हो गए। इन्हीं रिक्त पदों को भरने के लिए अब उपचुनाव कराया जा रहा है।
उपचुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद जिला स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मतदान केंद्रों की व्यवस्था, चुनाव कार्मिकों की तैनाती, मतपत्रों की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर प्रशासन तैयार
राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी चुनावी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मतदान और मतगणना के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता का पालन कराने पर भी जोर रहेगा।
इस उपचुनाव के जरिए लंबे समय से रिक्त चल रहे पंचायत पदों को भरा जाएगा, जिससे संबंधित ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली को पूरा करने में मदद मिलेगी।