

‘राजनीतिक अस्थिरता राज्य के लिए ठीक नहीं’
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में विकास हुआ है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि पहले लखनऊ से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सीमित थी, लेकिन अब दूरदराज के क्षेत्रों के लोग भी मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं।
उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की भूमिका विकास और नई पीढ़ी के भविष्य को प्रभावित करती है। यदि जनता किसी प्रतिनिधि के काम से संतुष्ट नहीं है, तो उसे अगले चुनाव में बदलने का विकल्प भी लोकतंत्र में मौजूद है।
युवाओं के आक्रोश पर बोले त्रिवेंद्र, विरोध लोकतंत्र का हिस्सा
युवाओं के आक्रोश और विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे हिंसा या अराजकता का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कुछ घटनाओं के पीछे सुनियोजित दिशा दिए जाने की आशंका भी जताई।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थिति को अच्छी तरह संभाला गया। साथ ही, राहुल गांधी के चुनाव आयोग के घेराव के दौरान आकाशवाणी कार्यालय में प्रवेश करने जैसी घटनाओं को अनुचित बताया। रावत ने कहा कि अराजकता फैलाने वाले लोगों को नियंत्रित करना आवश्यक है।
‘धामी सरकार का पांच नहीं, भाजपा का दस साल का कार्यकाल’
धामी सरकार के कामकाज पर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्ष 2017 से भाजपा की सरकार काम कर रही है और मौजूदा सरकार उसी विकास यात्रा को आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बने थे, तब भाजपा को लंबे समय तक सत्ता में बनाए रखने और राज्य की तरक्की के लिए काम करने का लक्ष्य रखा गया था। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उसी दिशा में काम कर रहे हैं।
रावत ने अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, होम स्टे और एडवेंचर टूरिज्म जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है और करीब 36 हजार लोगों को सरकारी नौकरियां दी हैं।
हरिद्वार में जीत के लिए साफ छवि और बेहतर प्रत्याशी जरूरी
अपने लोकसभा क्षेत्र हरिद्वार की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए रावत ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण अलग होते हैं। विपक्ष भले ही हरिद्वार को अपने अनुकूल मानता हो, लेकिन भाजपा के पास भी यहां जीतने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
उन्होंने हरिद्वार ग्रामीण, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, भगवानपुर और ज्वालापुर जैसी विधानसभा सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि साफ छवि वाले प्रत्याशी, मेहनत, विनम्र व्यवहार और जनता के मिजाज की समझ चुनावी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
रावत ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं और अहंकार छोटी-सी बात को भी बड़ा बना सकता है। उनके अनुसार, सही रणनीति और अच्छे प्रत्याशियों के दम पर भाजपा हरिद्वार में पांच से छह अतिरिक्त सीटें जीतने की दिशा में काम कर सकती है।
‘गलत को गलत कहना जरूरी, तभी बचेगा आंतरिक लोकतंत्र’
अपने बयानों की सोशल मीडिया पर होने वाली व्याख्या और उन्हें पार्टी के खिलाफ बताए जाने के सवाल पर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ऐसा सोचने वालों को अपनी सोच पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की है और पार्टी को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।
रावत ने जोर देकर कहा कि यदि कोई गलत काम करता है, तो उसे गलत कहना जरूरी है। यदि कोई सही दिशा में नहीं जा रहा है, तो उसे समय रहते आगाह किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसा नहीं किया जाएगा, तो पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कैसे कायम रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई जानबूझकर उनके बयानों की गलत व्याख्या करता है, तो उस पर उनका नियंत्रण नहीं है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर खुलकर अपनी बात रखने और गलतियों पर सवाल उठाने की आवश्यकता से जोड़कर देखा जा रहा है।