नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा ग्रुप-सी भर्ती में एक पूर्व सैनिक का आवेदन निरस्त किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।
यह मामला पूर्व सैनिक टीका सिंह द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिस पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में सुनवाई हुई।

चयन प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद आवेदन निरस्त
याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने ग्रुप-सी भर्ती की लिखित परीक्षा, आयु पात्रता, टाइपिंग टेस्ट और दस्तावेज सत्यापन सहित चयन प्रक्रिया के सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए थे। इसके बावजूद UKSSSC ने उनका आवेदन निरस्त कर दिया।
आयोग ने आवेदन रद्द करने के लिए राज्य सरकार के 22 मई 2020 के शासनादेश (GO) का हवाला दिया। शासनादेश के अनुसार, यदि किसी पूर्व सैनिक ने पहले केंद्र सरकार की नौकरी में पूर्व सैनिक आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह दोबारा इस आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही 22 मई 2020 के शासनादेश को कानून के अनुरूप नहीं मान चुकी है। ऐसे में आयोग द्वारा उसी शासनादेश के आधार पर आवेदन निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य में लागू वर्ष 1993 के अधिनियम की धारा-2 में पूर्व सैनिक की परिभाषा निर्धारित है। इस कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी पात्र पूर्व सैनिक को दोबारा आरक्षण का लाभ लेने से रोकता हो।
हाईकोर्ट ने आयोग से मांगा स्पष्टीकरण
प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की दलीलों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने UKSSSC से पूछा है कि जब खंडपीठ पहले ही संबंधित शासनादेश को कानून के विपरीत मान चुकी है, तो फिर किस आधार पर अभ्यर्थी का आवेदन और चयन निरस्त किया गया।
3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। इस दौरान UKSSSC को हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। माना जा रहा है कि इस मामले में आने वाला फैसला भविष्य में पूर्व सैनिकों के आरक्षण और राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।