देहरादून: उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के पहले चरण के पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस चरण के तहत चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज 19,04,380 मतदाताओं की जानकारी में विसंगतियां पाए जाने पर उन्हें नोटिस जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार उत्तराखंड में कुल 71,33,785 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें करीब 27 फीसदी मतदाताओं के रिकॉर्ड में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां पाई गई हैं। इन त्रुटियों के सत्यापन और सुधार के लिए संबंधित मतदाताओं से निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब मांगा गया है।
सत्यापन के लिए लगाए जाएंगे विशेष कैंप
निर्वाचन आयोग ने बताया कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर कैंप आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां मतदाता आवश्यक दस्तावेज जमा कर अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकेंगे।
इन जिलों में सबसे अधिक नोटिस
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक विसंगतियां देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में सामने आई हैं। देहरादून में 3.95 लाख, हरिद्वार में 3.90 लाख और उधम सिंह नगर में 3.36 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल समेत अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
किन कारणों से जारी हुए नोटिस?
निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाताओं को भेजे गए नोटिस आठ प्रमुख प्रकार की विसंगतियों के आधार पर जारी किए गए हैं। इनमें परिवार के सदस्यों की आयु में असामान्य अंतर, नाम या संबंध से जुड़ी त्रुटियां, एक ही परिवार में असामान्य प्रविष्टियां, स्वयं मतदाता के विवरण में गलती और पिछली मतदाता सूची से जुड़े अनमैप्ड रिकॉर्ड जैसी कमियां शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड सत्यापन और सुधार के लिए है।
कांग्रेस ने जताई आपत्ति
कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस भेजकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्येक मतदाता के मतदान अधिकार की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों से नोटिस का जवाब देने की अपील की है।
मुख्यमंत्री धामी ने बताया नियमित प्रक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सूची का उद्देश्य केवल पात्र मतदाताओं को शामिल करना और रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। जो लोग अब राज्य में निवास नहीं करते, जिनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या जो पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते, उनका सत्यापन नियमानुसार किया जाता है।
आयोग ने जारी किए मान्य दस्तावेज
मतदाता सत्यापन के लिए निर्वाचन आयोग ने जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, सरकारी पहचान पत्र, पेंशन दस्तावेज, परिवार रजिस्टर, भूमि अथवा मकान आवंटन से जुड़े दस्तावेज सहित कई सरकारी प्रमाण पत्रों को मान्य माना है। आयोग ने कहा है कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाता निर्धारित समय के भीतर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखें, ताकि जांच पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जा सके।
फिलहाल चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है। एक ओर विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार इसे मतदाता सूची के शुद्धिकरण की सामान्य और पारदर्शी प्रक्रिया बता रही है।