Headline
पीएम मोदी के कार्यक्रम में किच्छा के युवक को किया गया नोमिनेट
सुप्रीम कोर्ट की फटकार : हरक सिंह रावत और किशन चंद को कॉर्बेट नेश्नल पार्क मामले में नोटिस
उत्तराखंड के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में CM धामी ने किया छठवें वैश्विक आपदा प्रबंधन सम्मेलन का शुभारम्भ
उत्तराखंड में निर्माणाधीन टनल धंसने से बड़ा हादसा, सुरंग में 30 से 35 लोगों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
मशहूर टूरिस्ट स्पॉट पर हादसा, अचानक टूट गया कांच का ब्रिज, 30 फीट नीचे गिरकर पर्यटक की मौत
81000 सैलरी की बिना परीक्षा मिल रही है नौकरी! 12वीं पास तुरंत करें आवेदन
देश के सबसे शिक्षित राज्य में चपरासी की नौकरी के लिए कतार में लगे इंजीनियर, दे रहे साइकिल चलाने का टेस्ट
Uttarakhand: पहली बार घर-घर किया गया विशेष सर्वे, प्रदेश से दो लाख मतदाता गायब, नोटिस जारी
Uttarakhand: धामी सरकार का एलान, राज्य स्थापना दिवस तक हर व्यक्ति को मिलेगा आयुष्मान कवच

72 लोगों का परिवार… रोज 10 लीटर दूध-1200 रुपये की सब्जी… मुश्किल में पड़ जाती हैं नई बहुएं

महाराष्ट्र के सोलापुर का एक परिवार सुर्खियों में है. इस संयुक्त परिवार (Joint Family) में 72 सदस्य हैं, जो कि एक छत के नीचे हंसी-खुशी रहते हैं. दोईजोडे परिवार में 1000 से 1200 रुपये तक की सब्जियों की खपत प्रतिदिन होती है. वहीं, 10 लीटर दूध एक दिन में लग जाता है.

मूल रूप से कर्नाटक से आने वाला दोईजोडे परिवार लगभग 100 साल पहले सोलापुर आया था. इस व्यापारी परिवार की चार पीढ़ियां एक साथ, एक घर में रहती हैं. परिवार की महिला सदस्यों का कहना है कि शुरुआत में वो परिवार में सदस्यों की संख्या से डरती थीं. लेकिन अब वो इसमें घुल मिल गई हैं.

दोईजोडे परिवार के वीडियो को ट्विटर पर @Ananth_IRAS यूजर ने शेयर किया है. इस वीडियो को BBC ने शूट किया है. यूजर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा- ‘एक भारतीय संयुक्त परिवार की सुंदरता.’

वीडियो में परिवार के एक सदस्य अश्विन दोईजोडे कहते हैं- ‘हमारा इतना बड़ा परिवार है कि हमें सुबह और शाम मिलाकर 10 लीटर दूध की जरूरत होती है. हर दिन खाने में लगभग 1200 रुपये की सब्जियां लग जाती हैं. नॉनवेज खाना इससे तीन से चार गुना अधिक महंगा पड़ता है.’

अश्विन आगे कहते हैं- हम साल भर का चावल, गेहूं और दाल खरीदते हैं. करीब 40 से 50 बोरी. हमें इतनी बड़ी मात्रा की आवश्यकता होती है, इसलिए हम थोक में खरीदते हैं. यह थोड़ा किफायती होता है.

संयुक्त परिवार की बहू नैना दोईजोडे कहती हैं- इस परिवार में पैदा हुए और पले-बढ़े लोग आसानी से रहते हैं. लेकिन जो महिलाएं इसमें शादी कर आई हैं, उन्हें शुरू में थोड़ा मुश्किल होती है. शुरुआत में मुझे इस परिवार के संदस्यों की संख्या से डर लगता था. लेकिन सबने मेरी मदद की. मेरी सास, बहन और देवर ने मुझे घर में एडजस्ट करने में मदद की. अब सबकुछ सामान्य है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top