गदरपुर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गदरपुर दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस और पुलिस आमने-सामने आ गए हैं। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव शिल्पी अरोरा और कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अरोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। वहीं, सिद्धार्थ अरोरा की जमानत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोतवाली गदरपुर में धरना देकर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नवीन अनाज मंडी में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की। सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही पुलिस ने मौके पर महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव शिल्पी अरोरा और कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अरोरा को हिरासत में ले लिया।
जमानत के बाद शुरू हुआ धरना
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने सिद्धार्थ अरोरा को वर्ष 2020 में दर्ज एक पुराने मामले में जारी वारंट का हवाला देकर न्यायालय में पेश किया। अदालत से जमानत मिलने के बाद सिद्धार्थ अरोरा को रिहा कर दिया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता कोतवाली गदरपुर पहुंचे और पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गए।
‘पुराने मुकदमे का किया गया दुरुपयोग’
सिद्धार्थ अरोरा का आरोप है कि जिस मुकदमे में उन्हें कोर्ट भेजा गया, उसमें एक अन्य आरोपी ऐसा नेता भी था, जो अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुका है। उनका कहना है कि वर्षों पुराने मामले को अचानक सक्रिय कर राजनीतिक विरोध को दबाने की कोशिश की गई।
शिल्पी अरोरा ने लगाए गंभीर आरोप
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव शिल्पी अरोरा ने आरोप लगाया कि वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग उठा रही थीं। इसी दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे उन्हें चोटें आईं। उन्होंने पुलिस पर महिला नेताओं के साथ अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।
प्रशासन पर कांग्रेस के निशाने
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सरकार विरोध की आवाज को पुलिस के जरिए दबाने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर, इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।