

प्राधिकरण के अनुसार, शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करने वाले या इसके लिए आवेदन करने वाले मदरसों को विभागीय मानकों और निर्धारित शैक्षिक नियमों का पालन करना होगा। इसी के तहत शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी देने की व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। यह निर्णय उन मदरसों पर भी लागू होगा, जो मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ने के लिए मान्यता प्रक्रिया में शामिल हैं।
प्राधिकरण का उद्देश्य मदरसा शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुरूप बनाना और विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
76 मदरसों को मिल चुकी है मान्यता
प्रदेश में अब तक 76 मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता मिल चुकी है। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार में 270 में से 44, ऊधमसिंह नगर में 119 में से 24, देहरादून में 41 में से छह और नैनीताल में 18 में से दो मदरसों को मान्यता दी गई है।
इसके अलावा 114 अन्य मदरसों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया है। इस तरह मान्यता प्राप्त और आवेदन करने वाले कुल 206 मदरसे निर्धारित शैक्षिक व्यवस्था के दायरे में आएंगे।
30 हजार से अधिक विद्यार्थी मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़े
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, प्रदेश में 206 मदरसों के 30 हजार से अधिक बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। इन संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य विद्यालयों की तर्ज पर स्कूली शिक्षा भी दी जा रही है।
डॉ. गांधी ने बताया कि शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता लेने के बाद भी कुछ मदरसों में पहले की तरह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश जारी रखा जा रहा था। इस व्यवस्था को बदलने के लिए शिक्षा महानिदेशक को पत्र लिखा गया है, ताकि मान्यता प्राप्त और मान्यता के लिए आवेदन करने वाले मदरसों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
नियमों का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत ने कहा कि जिन मदरसों को विद्यालय के रूप में मान्यता दी गई है, उन्हें राजकीय विद्यालयों में लागू नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग और राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की इस पहल के तहत मान्यता प्राप्ति की प्रक्रिया में शामिल मदरसों में शैक्षिक गतिविधियों और साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था को विभागीय मानकों के अनुरूप लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।