देहरादून। राजधानी देहरादून की महायोजना-2041 को लेकर आयोजित जनसुनवाई में नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने शहर के भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। लोगों ने कहा कि राजधानी का विकास केवल चौड़ी सड़कों और फ्लाईओवर तक सीमित न रहे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए।

साइकिल ट्रैक और हर 300 मीटर पर पार्क की मांग
जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने सुझाव दिया कि राजपुर रोड, आईएसबीटी और मोहकमपुर जैसे व्यस्त क्षेत्रों में सुरक्षित और समर्पित साइकिल ट्रैक विकसित किए जाएं। इसके साथ ही शहर में हर 300 मीटर की दूरी पर पार्क और हरित क्षेत्र विकसित करने की मांग भी उठी, ताकि लोगों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध हो सकें।
सार्वजनिक परिवहन को बनाया जाए अधिक प्रभावी
प्रतिभागियों ने कहा कि शहर में सार्वजनिक बस सेवाओं को इतना सुलभ, समयबद्ध और सुविधाजनक बनाया जाए कि लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर न रहना पड़े। उनका मानना है कि मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
यूरोपीय शहरों के मॉडल से लेने का सुझाव
जनसुनवाई में कई नागरिकों ने कोपेनहेगन, एम्स्टर्डम और वियना जैसे शहरों की शहरी विकास नीति से प्रेरणा लेने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इन शहरों में विकास का केंद्र वाहन नहीं, बल्कि नागरिक होते हैं। इसी अवधारणा को “Move People, Not Vehicles” के सिद्धांत के रूप में अपनाने की बात कही गई।
अव्यवस्थित शहरी विकास पर जताई चिंता
नागरिकों ने कहा कि देहरादून के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल तेजी से बढ़ती आबादी नहीं, बल्कि अव्यवस्थित शहरी विकास है। उनका मानना है कि यदि महायोजना-2041 केवल भवन निर्माण, प्लॉटिंग और सड़क चौड़ीकरण तक सीमित रही, तो भविष्य में शहर को ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पर्यावरण-अनुकूल और रहने योग्य शहर बनाने का अवसर
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों ने सुझाव दिया कि महायोजना-2041 में हरित क्षेत्र, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित सुविधाएं, साइकिल ट्रैक, सार्वजनिक परिवहन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। उनका मानना है कि यदि इन सुझावों को योजना में प्रभावी रूप से शामिल किया गया, तो देहरादून आने वाले वर्षों में देश के सबसे स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और रहने योग्य पर्वतीय शहरों में अपनी पहचान बना सकता है.