देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार ने प्रदेश के युवाओं को जोड़ने के लिए खेल महाकुंभ 2026 को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की है। सरकार ने इस बार 2 लाख से ज्यादा युवाओं को खेल महाकुंभ से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए गांव से लेकर न्याय पंचायत, विकासखंड, तहसील और जिला स्तर तक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
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1 सितंबर से शुरू होगा खेल महाकुंभ
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से खेल महाकुंभ की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। विभाग की निदेशक दीप्ति सिंह के मुताबिक आयोजन को सफल बनाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक सितंबर को टनकपुर से खेल महाकुंभ का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद प्रदेशभर में करीब एक महीने तक अलग-अलग स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। खेल महाकुंभ 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा।
गांव से जिला स्तर तक होगी प्रतियोगिता
खेल महाकुंभ के तहत प्रतियोगिताओं का आयोजन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रतिभागियों को ग्राम स्तर से न्याय पंचायत, विकासखंड, तहसील और जिला स्तर तक आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
सरकार का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को तलाशकर उन्हें आगे बढ़ने का मंच उपलब्ध कराना भी है।
2 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य
इस बार खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने 2 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रजिस्ट्रेशन अभियान चलाया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को अधिक से अधिक युवाओं का पंजीकरण कराने के लिए लक्ष्य भी दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि खेलों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाली नई खेल प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बेहतर अवसर देने में भी खेल महाकुंभ अहम भूमिका निभा सकता है।
दूरदराज के खिलाड़ियों पर भी रहेगी नजर
खेल महाकुंभ में गांव और छोटे क्षेत्रों के खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर ही प्रतियोगिता का मंच मिलेगा। इससे ऐसे खिलाड़ियों की पहचान हो सकेगी, जो संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में अभी तक बड़े मंच तक नहीं पहुंच पाए हैं।
प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे के स्तर पर खेलने का अवसर मिलेगा। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए प्रदेश में नई खेल प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें तराशने की कोशिश की जाएगी।
युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर भी नजर
प्रदेश में युवाओं की बड़ी आबादी और खेलों के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए सरकार इस आयोजन को व्यापक स्तर पर कराने जा रही है। वहीं, हाल के जैनजी आंदोलन के बाद युवाओं की भागीदारी और उनके मुद्दों को लेकर सामने आए आक्रोश के बीच सरकार के इस अभियान को राजनीतिक और सामाजिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि सरकार की ओर से खेल महाकुंभ को युवाओं को खेलों से जोड़ने और प्रतिभाओं को मंच देने की पहल के तौर पर पेश किया जा रहा है। अब देखना होगा कि 2 लाख से अधिक युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य जमीन पर कितना सफल होता है।