हल्द्वानी: गौलापार-तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर पर शनिवार रात हुए भीषण सड़क हादसे ने चार परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर में जान गंवाने वाले अंशु आर्या, राहुल, शिवम और आदित्य अपने-अपने परिवारों की उम्मीदों का सहारा थे। हादसे के बाद चारों परिवारों में मातम पसरा है।

इकलौते बेटे अंशु की मौत से परिवार बेसहारा
हादसे में जान गंवाने वाले अंशु आर्या अपने परिवार के इकलौते बेटे और एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में मां और तीन बहनें हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है, जबकि एक बहन अभी अविवाहित है।
अंशु हल्दूचौड़ स्थित एक फैक्टरी में काम कर परिवार का खर्च उठाते थे। उनकी मां एक निजी स्कूल में आया के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन सीमित आय के कारण घर की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से अंशु के कंधों पर थी।
परिजनों के अनुसार, दो महीने पहले छोटी बहन की शादी हुई थी, जिसके लिए परिवार पर कर्ज भी हो गया था। अंशु परिवार को भरोसा दिलाते थे कि वह हर महीने किस्त चुकाकर धीरे-धीरे पूरा कर्ज उतार देंगे। लेकिन सड़क हादसे ने परिवार का यह सहारा हमेशा के लिए छीन लिया।
मां पर टूटा दुखों का पहाड़
बेटे की मौत की खबर मिलते ही अंशु की मां बेसुध हो गईं। होश आने के बाद वह बार-बार बेटे के बारे में पूछती रहीं। पड़ोसियों का कहना है कि अंशु बेहद मिलनसार और जिम्मेदार स्वभाव के थे। वह अक्सर अपनी मां से कहते थे कि अब उन्हें ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि परिवार की जिम्मेदारी वह संभाल लेंगे।
तीन दोस्त एक ही फैक्टरी में करते थे काम
हादसे में जान गंवाने वाले राहुल, अंशु और शिवम हल्दूचौड़ स्थित एक फैक्टरी में साथ काम करते थे। तीनों उत्तर प्रदेश के बदायूं और बहेड़ी क्षेत्र से रोजगार की तलाश में हल्द्वानी आए थे और अपने परिवारों की आर्थिक जिम्मेदारी निभा रहे थे। वहीं आदित्य 12वीं कक्षा का छात्र था और उच्च शिक्षा के माध्यम से भविष्य संवारने का सपना देख रहा था।
राहुल के साथ टूट गए परिवार के सपने
राहुल दो भाइयों में सबसे छोटे थे। परिवार में माता-पिता, बड़ा भाई और दो बहनें हैं। उनके पिता गौला नदी में मजदूरी करते हैं, जबकि बड़ा भाई एक दुकान में काम करता है। राहुल भी नौकरी कर परिवार की आय बढ़ाने में सहयोग कर रहे थे।
परिजनों के अनुसार, राहुल अक्सर कहते थे कि दोनों भाई मिलकर अपनी बहनों की शादी अच्छे से कराएंगे। उनकी असमय मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
शिवम भी था परिवार की उम्मीद
शिवम के पिता मजदूरी और बंटाई का काम करते हैं। परिवार में बड़ा भाई दिव्यांग है, जबकि दूसरा भाई पेंटिंग का काम करता है। शिवम भी नौकरी कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटे थे। परिजनों के मुताबिक, वह अक्सर कहते थे कि अब माता-पिता को मजदूरी नहीं करने देंगे।
आदित्य के सपने भी अधूरे रह गए
हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य 12वीं कक्षा के छात्र थे। उनके पिता लोक निर्माण विभाग (PWD) से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। परिवार ने बेहतर शिक्षा के लिए उनका दाखिला प्रतिष्ठित विद्यालय में कराया था। आदित्य उच्च शिक्षा हासिल कर परिवार का नाम रोशन करना चाहते थे, लेकिन सड़क हादसे ने उनके सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया।
पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
इस दर्दनाक हादसे ने चार परिवारों से उनके अपने छीन लिए। किसी मां ने अपना इकलौता बेटा खोया, किसी बहन ने अपना भाई, तो किसी परिवार ने भविष्य का सहारा। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और ग्रामीण मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर गहरा शोक और संवेदना का माहौल है।