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खेत से बाजार तक विकसित होगी व्यवस्था
जायका प्रोजेक्ट का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना भी है। इसके लिए उत्पादन, भंडारण, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और विपणन पर एक साथ काम किया जाएगा। किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जोड़ने की भी योजना है, जिससे वे संगठित होकर अपनी उपज की बिक्री कर सकें और बाजार में बेहतर अवसरों का लाभ उठा सकें।
चार जिलों के 16 ब्लॉकों में होगा क्रियान्वयन
परियोजना के तहत चारों जिलों में चार-चार ब्लॉक चयनित किए गए हैं। इन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और कृषि संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए फल एवं सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी की संभावनाओं का बेहतर उपयोग करने के साथ ही किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ेंगे किसान
परियोजना के तहत भंडारण सुविधाओं का विकास करने के साथ कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि विशेषज्ञ किसानों के खेतों तक पहुंचकर उन्हें आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी देंगे। इससे उपज की गुणवत्ता सुधारने और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषि विभाग के सचिव सुरेंद्र नारायण पांडेय के अनुसार, परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों और कृषि विशेषज्ञों की टीम तैयार की गई है। विभाग का लक्ष्य वर्ष 2029 तक निर्धारित उद्देश्यों को हासिल करना है।

देरी के बाद अब समयसीमा में काम पूरा करने पर जोर
जायका प्रोजेक्ट की योजना वर्ष 2022 में सामने आई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसके क्रियान्वयन में देरी हुई। परियोजना पर वास्तविक काम वर्ष 2025 में शुरू हो सका। अब कृषि विभाग ने इसकी प्रगति तेज करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
हाल ही में शासन और कृषि विभाग के अधिकारियों की एक टीम जापान का दौरा कर लौटी है। इस दौरान परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। अब चारों जिलों में कार्यों को गति देने के लिए समर्पित टीम के माध्यम से क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
परियोजना के पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्रों में फल एवं सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने, किसानों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर होने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।