हल्द्वानी: उत्तराखंड के प्रतिष्ठित सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में एक चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल प्रशासन ने मृतक के परिजनों को गलती से किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया। मामला उस समय उजागर हुआ जब अंतिम संस्कार से पहले परिजन अंतिम दर्शन के लिए शव के पास पहुंचे और पहचान में गड़बड़ी का पता चला। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई और मोर्चरी प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठने लगे।

अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच हुआ खुलासा
मिली जानकारी के अनुसार, पनियाली निवासी 64 वर्षीय रमेश चंद्र भट्ट को जहरीला पदार्थ सेवन करने के बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। रविवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों को सौंप दिया।
परिजन शव को अपने घर ले गए और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। लेकिन अंतिम दर्शन के दौरान जब परिजनों ने शव का चेहरा देखा तो उनके होश उड़ गए। शव रमेश चंद्र भट्ट का नहीं था, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति का था।
दूसरे मृतक का शव पहुंचा परिवार के घर
मामले की पड़ताल करने पर पता चला कि अस्पताल प्रशासन ने गलती से बागेश्वर जिले के चिड़ंग गांव निवासी 40 वर्षीय मनोज सिंह का शव रमेश चंद्र भट्ट के परिजनों को सौंप दिया था। मनोज सिंह की भी अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी और उनका पोस्टमार्टम भी उसी दिन किया गया था।
जैसे ही शवों की अदला-बदली की जानकारी सामने आई, दोनों परिवारों में अफरा-तफरी मच गई। नाराज परिजन तत्काल शव को लेकर वापस अस्पताल पहुंचे और मोर्चरी के बाहर विरोध जताया।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
अस्पताल पहुंचे दोनों परिवारों ने मोर्चरी कर्मचारियों और अस्पताल प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि शव सौंपने से पहले पहचान की अनिवार्य प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके कारण इतनी बड़ी गलती हुई।
परिजनों ने सवाल उठाया कि जब शवों पर पहचान संबंधी दस्तावेज और टैग लगाए जाते हैं, तो फिर ऐसी चूक कैसे हो सकती है। घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मोर्चरी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल की शव प्रबंधन प्रणाली और पहचान प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शव की पहचान और सुपुर्दगी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक, ऐसी घटनाएं न केवल प्रशासनिक खामियों को उजागर करती हैं, बल्कि शोकग्रस्त परिवारों को मानसिक और भावनात्मक रूप से गहरा आघात भी पहुंचाती हैं।
जांच की मांग तेज
घटना के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रशासन पर भी भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शव पहचान प्रक्रिया को और अधिक सख्त एवं पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ गया है।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अस्पताल की लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।