लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के पद छोड़ने की घोषणा ने देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। उनके इस्तीफे की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई और ब्रिटिश मुद्रा पाउंड में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले पाउंड तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे ने ब्रिटेन की राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि वैश्विक निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
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बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच लिया फैसला
सूत्रों के अनुसार, कीर स्टारमर पिछले कुछ समय से आर्थिक चुनौतियों, सरकार की नीतियों और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का सामना कर रहे थे। लगातार बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
उनके इस्तीफे के बाद अब सत्तारूढ़ लेबर पार्टी में नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहैम संभावित दावेदारों में सबसे आगे माने जा रहे हैं, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
पाउंड पर क्यों पड़ा दबाव?
राजनीतिक अस्थिरता का असर सबसे पहले वित्तीय बाजारों पर दिखाई देता है। स्टारमर के इस्तीफे की खबर मिलते ही विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड की बिकवाली बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान सरकार के कई महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले प्रभावित हो सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नई सरकार आर्थिक सुधारों की बजाय लोकलुभावन खर्चों पर अधिक जोर देती है, तो इससे ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। साथ ही महंगाई और सरकारी कर्ज बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के सामने बढ़ सकती हैं चुनौतियां
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए मौद्रिक नीतियों को संतुलित रखना आसान नहीं होगा। यदि महंगाई और सरकारी खर्च दोनों बढ़ते हैं, तो ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक को कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं।
नए प्रधानमंत्री पर टिकी दुनिया की नजर
ब्रिटेन में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश की कमान किसके हाथ में जाएगी और नई सरकार आर्थिक मोर्चे पर क्या रणनीति अपनाएगी। दुनिया भर के निवेशक और कारोबारी समूह अगले प्रधानमंत्री के चयन और उनकी नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नई सरकार पूरी तरह से स्थापित नहीं हो जाती और आर्थिक एजेंडा स्पष्ट नहीं होता, तब तक पाउंड और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह ब्रिटेन की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।