देहरादून: उत्तराखंड में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़कर 12,642 हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, तंबाकू और नशे का सेवन, पर्यावरणीय कारण तथा बढ़ती उम्र इसके प्रमुख कारण हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में उत्तराखंड में कैंसर के 11,779 मरीज दर्ज किए गए थे। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार बीते पांच वर्षों में 863 नए मामले सामने आए हैं, जो लगभग 7.3 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाते हैं।
पर्वतीय राज्यों में दूसरे स्थान पर उत्तराखंड
कैंसर के मामलों के लिहाज से उत्तराखंड की स्थिति अन्य पर्वतीय राज्यों की तुलना में चिंताजनक बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर में 14,112 मरीजों के बाद उत्तराखंड में 12,642 कैंसर मरीज दर्ज किए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह संख्या 9,566 है। इस प्रकार उत्तराखंड में हिमाचल प्रदेश की तुलना में 3,076 अधिक कैंसर मरीज हैं।
पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग प्रकार के कैंसर अधिक
वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. अजीत तिवारी के अनुसार, उत्तराखंड में पुरुषों में फेफड़े, मुंह, आंत और पेट के कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। इसके पीछे सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू और शराब का सेवन प्रमुख कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि शराब के साथ धूम्रपान करने से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
वहीं महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक पाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली कई महिलाओं को सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियों के कारण समय पर जांच और नियमित उपचार नहीं मिल पाता। दूरस्थ इलाकों से देहरादून या अन्य बड़े शहरों तक इलाज के लिए पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों के कारण कई मामलों में बीमारी का उपचार समय पर शुरू नहीं हो पाता।
समय पर जांच और जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर की रोकथाम के लिए तंबाकू और नशे से दूरी, संतुलित जीवनशैली, नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि समय पर पहचान और उपचार से कैंसर के अधिकांश मामलों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।