देहरादून: उत्तराखंड के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से प्रतीक्षित देहरादून–रामनगर सीधी रेल सेवा का शुभारंभ 18 जुलाई से होने जा रहा है। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती चरण में ट्रेन का संचालन सप्ताह में दो दिन किया जाएगा। यात्रियों की संख्या और मांग बढ़ने पर इसकी आवृत्ति भविष्य में चार या पांच दिन तक बढ़ाई जा सकती है।

सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रामनगर, जिसे कॉर्बेट सिटी के नाम से भी जाना जाता है, वहां तक देहरादून से सीधी रेल सेवा की मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने कहा कि इस नई सुविधा से कुमाऊं और गढ़वाल के बीच संपर्क बेहतर होगा, साथ ही प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
यात्रियों और पर्यटकों को होगी सुविधा
नई रेल सेवा शुरू होने से रामनगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए देहरादून तक सरकारी, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और अन्य निजी कार्यों के लिए यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी। इसके अलावा देशभर से उत्तराखंड आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क तक सीधे और सुविधाजनक तरीके से पहुंच सकेंगे, जिससे राज्य के पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
शुरुआत में सप्ताह में दो दिन चलेगी ट्रेन
सांसद ने बताया कि फिलहाल इस रेल सेवा का संचालन प्रयोगात्मक आधार पर सप्ताह में दो दिन किया जाएगा। यदि यात्रियों की संख्या और मांग में वृद्धि होती है तो भविष्य में ट्रेन के फेरे बढ़ाकर सप्ताह में चार या पांच दिन किए जा सकते हैं। उन्होंने इस नई सुविधा को क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए रामनगर की जनता को शुभकामनाएं दीं।
लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग पर भी मिली राहत
सांसद अनिल बलूनी ने बताया कि लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग पर आवश्यक श्रेणी के सभी वाहनों के संचालन का रास्ता भी साफ हो गया है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (CEC) ने न्यायालय के आदेश में प्रयुक्त “कमर्शियल वाहन” शब्द को लेकर बनी भ्रम की स्थिति स्पष्ट कर दी है।
सीईसी ने सवारी वाहनों, सरकारी बसों, जीएमओयू बसों, स्कूल बसों, किसानों के ट्रैक्टरों तथा भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले आवश्यक वाहनों के संचालन को अनुमति प्रदान की है। सांसद ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने पहले सीईसी के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश गोयल को ज्ञापन सौंपा था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
नई रेल सेवा और सड़क मार्ग पर मिली इस राहत से उत्तराखंड में आवागमन आसान होने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.