बद्रीनाथ धाम चढ़ावा विवाद में बड़ा एक्शन! धामी सरकार ने बनाई हाई लेवल जांच कमेटी, BKTC कर्मचारी सस्पेंड
देहरादून: बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में उत्तराखंड सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में होगी जांच
सरकार द्वारा गठित जांच समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त करेंगे। समिति में दो अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों से भी तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग लिया जाएगा।
समिति को केवल आरोपों की जांच ही नहीं, बल्कि बद्रीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
BKTC ने भी दिखाई सख्ती, कर्मचारी निलंबित
मामले में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
मंदिर समिति के अनुसार, संबंधित कर्मचारी के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की गई, जिसकी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
जांच पूरी होने तक जोशीमठ कार्यालय से रहेंगे संबद्ध
बीकेटीसी ने बताया कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारी को नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। उन्हें बीकेटीसी के जोशीमठ कार्यालय से संबद्ध किया गया है और बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही जांच में पूरा सहयोग करना उनके लिए अनिवार्य रहेगा।
दान व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार और मंदिर समिति दोनों ने साफ किया है कि बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा। जांच समिति अपनी रिपोर्ट में भविष्य के लिए ऐसी व्यवस्थाओं की भी सिफारिश करेगी, जिससे इस तरह की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।
बीकेटीसी ने दोहराया कि मंदिर समिति में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.