ज्योतिर्मठ (चमोली)। औली के दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्र में भारत और अमेरिका की सेनाओं का संयुक्त युद्ध अभ्यास जारी है। अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन और भारतीय सेना की गढ़वाल रेजिमेंट के सैनिक अभ्यास के दौरान जंगल युद्ध, इनडोर फायरिंग और रॉक-फेस रैपेलिंग जैसी गतिविधियों में संयुक्त रूप से प्रशिक्षण ले रहे हैं।

घने जंगलों में नेविगेशन और फायरिंग का अभ्यास
संयुक्त टुकड़ियों के रूप में सैनिकों ने औली के घने जंगलों में नेविगेशन का अभ्यास किया। इस दौरान सिमुलेशन राउंड का इस्तेमाल करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को भेदने का प्रशिक्षण भी लिया गया।
अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने एक-दूसरे की रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं को समझा। इसका उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और पारस्परिक संचालन क्षमता विकसित करना है।
इनडोर शूटिंग रेंज में AK-203 से फायरिंग
प्रशिक्षण के दौरान सैनिकों ने औली स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड (FTN) में हाल ही में शुरू की गई इनडोर शूटिंग रेंज में भी अभ्यास किया। यहां सैनिकों को भारत में निर्मित AK-203 असॉल्ट राइफल से व्यावहारिक फायरिंग का प्रशिक्षण दिया गया।
इस अभ्यास के जरिए सैनिकों को अलग-अलग हथियार प्रणालियों और फायरिंग परिस्थितियों में बेहतर तालमेल बनाने का अवसर मिला।
रॉक-फेस रैपेलिंग से निखारे पर्वतीय युद्ध कौशल
संयुक्त प्रशिक्षण का समापन रैपेलिंग अभ्यास के साथ किया गया। सैनिकों ने खड़ी चट्टान से नीचे उतरने का अभ्यास किया और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाके में अभियान के लिए जरूरी पर्वतीय युद्ध कौशल को निखारा।
जंगल के कठिन रास्तों से लेकर फायरिंग रेंज और खड़ी चट्टानों तक चल रहे इस प्रशिक्षण में दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे के साथ जमीनी स्तर पर काम करने और व्यावहारिक अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है। अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य भारत-अमेरिका सेनाओं की पारस्परिक संचालन क्षमता को और मजबूत करना है।