
नई दिल्ली: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश में छात्र आंदोलन की सराहना करने और उससे प्रेरणा लेने संबंधी बयान पर देश की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके बयान की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए भारत में भी अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन की वकालत की जा रही है। वहीं, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेताओं ने भी बोरा के विचारों से असहमति जताई है। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उनके बयान का समर्थन किया है।

क्या कहा नेहा बोरा ने?
नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान छात्र आंदोलनों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। आंदोलन के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में शुरू हुए जेन-जी आंदोलन ने भारत सहित अन्य देशों के युवाओं को भी प्रेरित किया है।
बोरा के मुताबिक, बांग्लादेश में छात्र आंदोलन की शुरुआत लोकतांत्रिक और मतदाताओं के अधिकारों के मुद्दे से हुई थी। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा कार्यकर्ता वहां के छात्र आंदोलनों से सबक ले रहे हैं और उनके साथ एकजुटता रखते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश और भारत के युवा मिलकर बेहतर दक्षिण एशिया और बेहतर दुनिया के निर्माण के लिए संघर्ष कर सकते हैं। उनके इसी बयान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
Where “youth icon” Neha Bora thanks Bangladeshi youth for “inspiration” and confirms the aim of the movement is the VIOLENT and illegal OVERTHROW OF THE GOVERNMENT with the accompanying slaughter of Hindus. 👏🏾👏🏾👏🏾 https://t.co/zJLNjdObdm
— Abhijit Iyer-Mitra (@Iyervval) October 14, 2026
भाजपा का आरोप—अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन चाहती हैं बोरा
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने नेहा बोरा के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल का हवाला देकर भारत में भी इसी तरह की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
भंडारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि बोरा के बयान से राहुल गांधी और उनके राजनीतिक समर्थकों की मंशा स्पष्ट होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विरोध केवल राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन है।
वहीं, झारखंड भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में आरोप लगाया कि नेहा बोरा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अराजकता के जरिए सरकार बदलना चाहते हैं। उन्होंने बोरा के बांग्लादेशी आंदोलन की प्रशंसा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बयान से उनकी राजनीतिक सोच सामने आई है।
Delhi: Advocate Prashant Bhushan says, “There will definitely be a regime change. We all want a regime change. Is there anything wrong with that?…” https://t.co/vUDowEBAI8
— IANS (@ians_india) October 15, 2026
कांग्रेस ने बयान से बनाई दूरी
नेहा बोरा की टिप्पणियों पर कांग्रेस ने समर्थन देने से परहेज किया। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने स्पष्ट किया कि वह बोरा के बयान से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
अल्वी ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए। इस तरह उन्होंने सरकार बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया और कानून के पालन पर जोर दिया।
प्रशांत भूषण ने किया समर्थन
जहां कई राजनीतिक दलों ने नेहा बोरा के बयान से असहमति जताई, वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उनका समर्थन किया। मीडिया से बातचीत के दौरान भूषण ने कहा कि सत्ता परिवर्तन की इच्छा रखने में कुछ भी गलत नहीं है।
उन्होंने कहा, “सत्ता परिवर्तन तो जरूर होगा। हम सभी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। क्या इसमें कुछ गलत है?”
इस दौरान उनके साथ प्रकाश राज, नेहा बोरा और अभिजीत दिपके भी मौजूद थे।
Neha Bora who is poster girl of Rahul Gandhi proves Rahul’s resistance is not political.
Objective is regime change
Neha Bora says-” she is inspired by Regime change in Bangladesh and wants that to replicate in India” https://t.co/juxwGi8KUx
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) October 14, 2026
AAP ने भगत सिंह का दिया उदाहरण
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी नेहा बोरा के बयान से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह बोरा की निजी राय हो सकती है, लेकिन प्रेरणा के लिए भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों की ओर देखना चाहिए।
भारद्वाज ने भगत सिंह के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा के अनेक उदाहरण भारत के अपने इतिहास में मौजूद हैं। उनके मुताबिक, भारत को प्रेरणा हासिल करने के लिए किसी दूसरे देश के आंदोलन की नकल करने की आवश्यकता नहीं है।
VIDEO | Delhi AAP president Saurabh Bharadwaj on AISA president Neha Bora’s ‘inspired by Bangladesh protests’ remark, says, “This may be Neha Bora’s personal opinion. My view is that India’s Gen Z is inspired by Shaheed-e-Azam Bhagat Singh. At the age of 23, when most people are thinking about whether to pursue the civil services or an MBA after graduation, or join their parents’ business, Bhagat Singh embraced the gallows, kissing the noose before laying down his life. Therefore, we do not need to look for inspiration in any other country. Icons like Bhagat Singh, I believe, are unparalleled anywhere in the world.”
#SaurabhBharadwaj #NehaBora
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/bIyFWTfmBd)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 15, 2026
CPI ने भी बांग्लादेश से प्रेरणा लेने पर उठाए सवाल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद पी. संतोष कुमार ने भी इस मुद्दे पर अपनी असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरणा ली जा सकती है और किसी पड़ोसी देश के आंदोलन की नकल करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने भारतीय छात्र और युवा संगठनों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संगठन लंबे समय से सरकारों की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, भारत की अपनी राजनीतिक परंपरा और संघर्ष का इतिहास है, इसलिए प्रेरणा के लिए बांग्लादेश, नेपाल या किसी अन्य देश की ओर देखने की अनिवार्यता नहीं है।
#WATCH | Delhi: On AISA President Neha Bora’s “showing us the way” video message while speaking on Bangladesh’s Gen-Z protest, CPI MP P. Sandosh Kumar says, “I don’t know anything about this Bangladesh-related controversial statement. We fight for the removal of Gyanesh Kumar and this country. For us, the source of inspiration is India’s freedom movement… There is no need to get inspiration from any other source… Our student youth federations were always rebellious against governments. They always fought against anti-people policies… There is no need to copy Bangladesh or Nepal or any other country. We have our own path, our own tradition.”
— ANI (@ANI) October 15, 2026
क्या है बांग्लादेश के छात्र आंदोलन का पूरा मामला?
बांग्लादेश में वर्ष 2024 में आरक्षण नीति के विरोध में छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू हुआ था। शुरुआत में आरक्षण व्यवस्था को लेकर केंद्रित यह विरोध धीरे-धीरे व्यापक सरकार-विरोधी आंदोलन में बदल गया।
आंदोलन के बढ़ने और राजनीतिक संकट गहराने के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अगस्त 2024 में पद छोड़ दिया और देश से चली गईं। इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया और दुनिया भर में छात्र आंदोलनों तथा युवाओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी।
भारत में नेहा बोरा के बयान के बाद इसी घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जहां भाजपा ने इसे भारत में अराजकता और सत्ता परिवर्तन की कथित कोशिश से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं विपक्षी दलों के कई नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश की अपनी राजनीतिक परंपराओं को प्राथमिकता देने की बात कही है।