नैनीताल: जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। महिला से छेड़छाड़ के आरोप में पकड़े गए चार पर्यटकों से कथित तौर पर 18 हजार रुपये लेकर उन्हें छोड़ने के आरोप के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामला सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने पर एसएसपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चौकी इंचार्ज और एक कांस्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया है।

महिला से छेड़छाड़ की शिकायत पर पकड़े गए थे पर्यटक
जानकारी के मुताबिक, ज्योलीकोट क्षेत्र के ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी थी कि स्कॉर्पियो वाहन में सवार चार पर्यटकों ने एक महिला के साथ छेड़छाड़ की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और वायरलेस संदेश के जरिए आसपास तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क किया गया। इसके बाद रानीबाग क्षेत्र के पास वाहन को रोककर चारों पर्यटकों को हिरासत में लेते हुए ज्योलीकोट चौकी लाया गया।
कार्रवाई के बजाय पैसों के लेनदेन का आरोप
आरोप है कि चौकी पहुंचने के बाद पर्यटकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उनसे 18 हजार रुपये लिए गए और उन्हें छोड़ दिया गया। जब आरोपितों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ने पर कथित तौर पर ली गई रकम ऑनलाइन माध्यम से पर्यटकों को वापस कर दी गई, लेकिन तब तक यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका था।
सोशल मीडिया पर उठा मामला, एसएसपी ने लिया संज्ञान
घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद मामला नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी के संज्ञान में पहुंचा। प्रारंभिक जांच में ऑनलाइन लेनदेन की शिकायत सही पाए जाने पर एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से ज्योलीकोट चौकी इंचार्ज श्याम बोरा और कांस्टेबल धर्मेंद्र साहनी को लाइन हाजिर कर दिया।
विभागीय जांच के आदेश
एसएसपी ने बताया कि महिला से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों में विधिक कार्रवाई करने के बजाय पैसों के लेनदेन की शिकायत मिली थी। शिकायत की पुष्टि होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस घटनाक्रम ने पुलिस की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता दोनों पर सवाल खड़ा करता है। अब विभागीय जांच में यह साफ होगा कि कथित रूप से रुपये लेने के पीछे क्या कारण थे और पूरे मामले में किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका थी या नहीं।
फिलहाल दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है।