नैनीताल: मौसम अनुकूल रहा तो अगस्त के पहले सप्ताह में आकाश प्रेमियों को एक दुर्लभ खगोलीय दृश्य देखने का अवसर मिलेगा। धूमकेतु 10P/टेम्पल 2 (10P/Tempel 2) पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब पहुंचेगा। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह धूमकेतु 2/3 अगस्त को पृथ्वी के सबसे नजदीक होगा और इसे छोटी दूरबीन की सहायता से देखा जा सकेगा।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि वर्ष 1967 में भी यह धूमकेतु पृथ्वी के इतने ही करीब आया था। हालांकि 10P/टेम्पल 2 लगभग 5.5 वर्ष में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है, लेकिन पृथ्वी के इतने करीब कई दशकों में एक बार ही पहुंचता है।
उन्होंने बताया कि इस धूमकेतु की खोज 4 जुलाई 1873 को जर्मन खगोलविद विल्हेम टेम्पल ने की थी। इसका व्यास लगभग 10.6 किलोमीटर है, जो प्रसिद्ध हैली धूमकेतु के आकार के लगभग बराबर माना जाता है।
6.19 करोड़ किलोमीटर होगी न्यूनतम दूरी
वैज्ञानिकों के अनुसार, 2/3 अगस्त को धूमकेतु 10P/टेम्पल 2 पृथ्वी से लगभग 6.19 करोड़ किलोमीटर की न्यूनतम दूरी पर होगा। सूर्य के करीब पहुंचने पर इसकी सतह पर जमी बर्फ गर्मी के प्रभाव से भाप में बदलने लगती है, जिससे इसके पीछे धूल और गैस की लंबी, चमकदार पूंछ बनती है। यही पूंछ धूमकेतु को आकर्षक स्वरूप प्रदान करती है और लाखों किलोमीटर तक फैली हो सकती है।
छोटी दूरबीन से होगा अवलोकन
डॉ. पांडेय के अनुसार, पृथ्वी के निकट आने के समय इस धूमकेतु की चमक लगभग 7 मैग्नीट्यूड होगी। इसलिए इसे खुली आंखों से देख पाना संभव नहीं होगा, लेकिन एक छोटी दूरबीन या टेलीस्कोप की सहायता से इसका अवलोकन किया जा सकेगा।
वैज्ञानिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण अवसर
डॉ. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि धूमकेतुओं का पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब आना खगोलीय दृष्टि से सामान्य घटना है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए ऐसे अवसर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इनके माध्यम से धूमकेतुओं की संरचना, गति, कक्षा और व्यवहार का अध्ययन कर सौरमंडल की उत्पत्ति और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।