देहरादून/नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में एक अहम और आधुनिक कदम उठाया है। नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि अब राज्य में चेक बाउंस मामलों में समन पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ ईमेल और WhatsApp जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी जारी किए जा सकेंगे।

रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, यह व्यवस्था उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025 के तहत लागू की गई है। कोर्ट का कहना है कि इस फैसले से समन की तामील में होने वाली देरी कम होगी और मामलों की सुनवाई तेज हो सकेगी।
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि चेक बाउंस से संबंधित शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता को आरोपी का सही ईमेल आईडी और WhatsApp नंबर देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, दी गई जानकारी की प्रमाणिकता को प्रमाणित करने के लिए शपथपत्र (हलफनामा) भी दाखिल करना होगा।
नई प्रक्रिया के तहत हर शिकायत के साथ एक निर्धारित फॉर्मेट में सिनॉप्सिस संलग्न करना जरूरी होगा, जिसे कोर्ट स्टाफ द्वारा कंप्यूटर सिस्टम में फीड किया जाएगा। आरोपी को समन जारी करने से पहले BNNS की धारा 223 के अंतर्गत किसी अतिरिक्त औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में राहत को और आसान बनाते हुए ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी शुरू की है। इसके लिए सॉफ़्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्प्लेट जोड़ा गया है, जो ‘कॉज ऑफ एक्शन’ से जुड़े लिमिटेशन पीरियड की स्वतः गणना करेगा। समन में ऑनलाइन भुगतान लिंक का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।
आरोपी CNR नंबर या केस से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सीधे चेक की राशि ऑनलाइन जमा कर सकेगा। यदि आरोपी इस विकल्प के माध्यम से भुगतान करता है, तो कोर्ट कंपाउंडिंग के आधार पर मामले को समाप्त कर सकता है।
यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के संजाबीज तुरी बनाम किशोर एस. बरकर मामले में दिए गए हालिया फैसले के अनुपालन में जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में लाखों चेक बाउंस मामलों के लंबित होने और इससे न्यायिक व्यवस्था पर पड़ रहे दबाव पर चिंता जताई थी।
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया है कि यदि शिकायतकर्ता द्वारा गलत ईमेल या WhatsApp जानकारी दी जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।