नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाले समय में नियम बदल सकते हैं। केंद्र सरकार ने संसद में एक विधेयक पेश किया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह विधेयक लागू होता है तो सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह तय करे कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लागू होगा और किन्हें इससे छूट मिलेगी।

गौरतलब है कि जनवरी 2020 से यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान पर MDR पूरी तरह शून्य है। अब सरकार इस व्यवस्था को लचीला बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
क्या है नए विधेयक में प्रस्ताव?
सरकार ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा कानून के तहत यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड जैसे अधिसूचित भुगतान माध्यमों पर बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कोई मर्चेंट शुल्क नहीं ले सकते।
प्रस्तावित संशोधन के बाद यह निर्णय सरकार के हाथ में होगा। केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना जारी कर तय करेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर MDR लागू रहेगा और किन्हें शुल्क से छूट मिलेगी।
MDR क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर वसूलते हैं। वर्तमान में क्रेडिट कार्ड पर करीब 1.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर 0.9 प्रतिशत तक MDR लागू है, जबकि यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह बदलाव?
भारत में यूपीआई लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। जुलाई महीने में यूपीआई के जरिए 23.6 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। डिजिटल भुगतान के इस तेजी से बढ़ते नेटवर्क को संचालित करने वाली कंपनियां लंबे समय से MDR व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रही हैं।
उनका कहना है कि बिना किसी शुल्क के लगातार बढ़ते ट्रांजेक्शन को संभालने, तकनीकी ढांचे को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा पर निवेश करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
किन ट्रांजेक्शन पर लग सकता है शुल्क?
सूत्रों के मुताबिक सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें एक निश्चित सीमा से अधिक के यूपीआई भुगतान पर MDR लागू करना या फिर केवल बड़े कारोबारियों को इसके दायरे में लाना शामिल है।
एक प्रस्ताव के अनुसार, 1.5 करोड़ रुपये से अधिक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों के यहां 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक MDR लगाया जा सकता है। वहीं छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को इससे बाहर रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल यूपीआई पर किसी प्रकार का नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। संसद में पेश विधेयक केवल सरकार को भविष्य में MDR को लेकर निर्णय लेने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। यदि यह कानून बनता है और बाद में सरकार अधिसूचना जारी करती है, तभी किसी प्रकार का शुल्क लागू होगा।
इसलिए फिलहाल आम यूपीआई यूजर्स पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।