पिथौरागढ़: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार क्रिकेटर ऋषभ पंत के उत्तराखंड लौटने की चर्चाओं के बीच उनके पैतृक गांव पाली-अमदली से बड़ी खबर सामने आई है। गांव में ऋषभ पंत के पुराने और जर्जर पैतृक मकान के पुनर्निर्माण का काम शुरू हो गया है। घर के दोबारा बनना शुरू होने से ग्रामीणों में उत्साह है और उन्हें उम्मीद है कि ऋषभ पंत आने वाले समय में अपने गांव से दोबारा जुड़ेंगे। ग्रामीण इसे रिवर्स पलायन की दिशा में भी अहम कदम मान रहे हैं।

करीब 20 साल बाद गांव पहुंचीं ऋषभ पंत की मां
ऋषभ पंत की मां सरोज पंत 4 अगस्त को करीब दो दशक बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचीं। वह लगभग पांच दिन तक गांव में रहीं। इस दौरान उन्होंने पुराने पारिवारिक मकान के पुनर्निर्माण की तैयारियां कीं और निर्माण के लिए ठेकेदार की तलाश कर काम शुरू कराया।
ऋषभ पंत के चाचा मदन मोहन पंत के अनुसार, परिवार ने पुराने घर को दोबारा बनाने का काम शुरू कर दिया है। परिवार को उम्मीद है कि मकान तैयार होने के बाद ऋषभ पंत भी गांव में अधिक समय बिता सकेंगे।
कभी 250 की आबादी वाला गांव अब रह गया करीब 50 लोगों तक
पाली-अमदली गांव में कभी करीब 250 लोग रहते थे। लेकिन रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लगातार हुए पलायन के चलते अब गांव की आबादी घटकर लगभग 50 लोगों तक रह गई है।
ऐसे में ऋषभ पंत के परिवार का गांव से दोबारा जुड़ना ग्रामीणों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऋषभ पंत जैसे लोकप्रिय खिलाड़ी का गांव में नियमित आना-जाना शुरू होता है तो इससे अन्य लोगों और युवाओं को भी अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा मिल सकती है।
सात साल की उम्र में गांव आए थे ऋषभ पंत
ग्रामीणों के मुताबिक, ऋषभ पंत के दादा करीब 60 साल पहले रोजगार की तलाश में गांव से रुड़की चले गए थे। इसके बाद करीब 20 साल पहले ऋषभ पंत भी अपने परिवार के साथ पाली-अमदली आए थे। उस समय उनकी उम्र करीब सात वर्ष थी।
बताया जाता है कि ऋषभ ने अपने बचपन का कुछ समय गांव में बिताया था। यही वजह है कि स्थानीय लोगों का उनसे भावनात्मक जुड़ाव है और उनके गांव लौटने की खबर को ग्रामीण खास उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं।
उत्तराखंड में जमीन खरीदने की इच्छा जता चुके हैं ऋषभ
ऋषभ पंत उत्तराखंड में जमीन खरीदकर रहने की इच्छा पहले ही जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए जमीन खरीदने में मदद की अपील की थी।
ऋषभ ने कहा था कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में जमीन लेकर यहां रहने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अभी तक अपनी जरूरत के मुताबिक जमीन नहीं मिल पाई है। उन्होंने खुद को उत्तराखंड का स्थानीय निवासी बताते हुए प्रदेश के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया था।
मुख्यमंत्री धामी ने भी उनके संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि ऋषभ पंत ने अपने शानदार खेल से देश और दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी मातृभूमि के प्रति पंत के प्रेम को सराहनीय बताते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही थी।
23.84 करोड़ रुपये आयकर देने का दावा
ऋषभ पंत का उत्तराखंड से जुड़ाव आर्थिक स्तर पर भी चर्चा में रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्होंने करीब 23.84 करोड़ रुपये व्यक्तिगत आयकर का भुगतान किया। इस आधार पर उन्हें उत्तराखंड के प्रमुख व्यक्तिगत करदाताओं में शामिल किया गया।
मूल रूप से पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र से जुड़े ऋषभ पंत का परिवार लंबे समय से रुड़की में भी रहा है। अब पैतृक गांव में पुराने मकान का पुनर्निर्माण और उत्तराखंड में जमीन खरीदकर बसने की उनकी इच्छा एक बार फिर चर्चा में है।
घर बनने से ग्रामीणों को रिवर्स पलायन की उम्मीद
पाली-अमदली में ऋषभ पंत के पुराने घर का पुनर्निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में खासा उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि घर तैयार होने के बाद पंत परिवार का गांव से संपर्क और मजबूत होगा।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि ऋषभ पंत नियमित रूप से गांव आते हैं या भविष्य में उत्तराखंड में स्थायी रूप से रहने का फैसला करते हैं, तो यह क्षेत्र के लिए बड़ी प्रेरणा साबित हो सकता है। इससे गांव के युवाओं और पलायन कर चुके परिवारों में भी अपनी जड़ों की ओर लौटने की भावना मजबूत हो सकती है।