देहरादून। उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था शिक्षकों की कमी से जूझ रही है। प्रदेश में विशेष शिक्षकों के स्वीकृत 285 पदों में से 200 से अधिक पद खाली हैं। ऐसे में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और समावेशी विकास को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से रिक्त पदों पर भर्ती की मांग की जा रही है।पौड़ी गढ़वाल में आठ पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं और 38 पद खाली हैं। वहीं, चमोली में छह पद भरे गए हैं, जबकि 21 पदों पर नियुक्ति होना बाकी है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई जिलों में स्वीकृत पदों के मुकाबले विशेष शिक्षकों की उपलब्धता बेहद कम है। अन्य जनपदों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने की बात सामने आ रही है।

विशेषज्ञों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि समावेशी शिक्षा की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल पद सृजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन पदों पर नियमित रूप से नियुक्तियां भी जरूरी हैं। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार शिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने में विशेष शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

शासन ने 27 सितंबर 2022 को प्राथमिक विद्यालयों में विशेष शिक्षकों के 380 पद सृजित किए थे। इसके बाद 28 मई 2025 को जारी शासनादेश में संशोधन करते हुए पदों की संख्या घटाकर 285 कर दी गई। हालांकि, पदों की संख्या कम किए जाने के बावजूद इन पर पर्याप्त नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। इसका असर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप शिक्षा और सहयोग उपलब्ध कराने पर पड़ रहा है।
कई जिलों में विशेष शिक्षकों के अधिकांश पद रिक्त
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कई जनपदों में विशेष शिक्षकों की भारी कमी है। हरिद्वार में स्वीकृत 18 पदों में से केवल दो पर नियुक्ति हुई है, जबकि 16 पद खाली हैं। नैनीताल में 24 पदों में से तीन भरे गए हैं और 21 पद रिक्त हैं।
इसी तरह उत्तरकाशी में 18 पदों में से आठ पर विशेष शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 10 पद खाली हैं। पौड़ी गढ़वाल में स्वीकृत 46 पदों में से आठ भरे गए हैं और 38 पद रिक्त हैं। वहीं, चमोली में 27 पदों में से छह पर नियुक्ति हुई है, जबकि 21 पदों पर भर्ती होना बाकी है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई जिलों में स्वीकृत पदों की तुलना में विशेष शिक्षकों की उपलब्धता बेहद कम है। अन्य जनपदों में भी रिक्त पदों की समस्या सामने आ रही है।
विशेष शिक्षकों की कमी से समावेशी शिक्षा पर असर
विशेषज्ञों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए केवल पद सृजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से नियुक्तियां करना भी जरूरी है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी शैक्षणिक और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पढ़ाने, मार्गदर्शन देने तथा सीखने की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों से निपटने में विशेष शिक्षकों की अहम भूमिका होती है।
शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को अपेक्षित सहयोग मिलने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में रिक्त पदों को जल्द भरने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि प्राथमिक स्तर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ समान अवसर भी मिल सकें।
भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए शासन से होगी वार्ता
विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने शासन से वार्ता करने की बात कही है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत के अनुसार, विशेष शिक्षकों के पदों को भरने के लिए शासन से बातचीत की जाएगी। शासनादेश जारी होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस संबंध में कब तक निर्णय लिया जाता है और विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया कब शुरू होती है। भर्ती में देरी का असर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।