रुद्रपुर। सोशल मीडिया पर दोस्ती, फिर प्रेमजाल में फंसाकर नाबालिगों को घर से दूर ले जाने और इसके बाद यौन शोषण तथा ब्लैकमेलिंग के आरोपों से जुड़े मामले ऊधम सिंह नगर जिले में चिंता बढ़ा रहे हैं। बाल कल्याण समिति (CWC) के अनुसार, इस तरह के चार से पांच मामले हर महीने समिति के सामने पहुंच रहे हैं। कुछ मामलों में नाबालिगों को दूसरे शहरों या राज्यों में ले जाने, दुष्कर्म, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और दबाव डालने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।


समिति के अनुसार, कुछ मामलों में आरोपियों ने सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान या दूसरे नाम से आईडी बनाकर नाबालिगों से संपर्क किया। शुरुआत में दोस्ती करने के बाद उन्हें मिलने के बहाने घर से बाहर बुलाया गया। इसके बाद उन्हें अपने साथ दूसरे स्थानों पर ले जाने और उनका शोषण करने के आरोप लगे। कुछ मामलों में वीडियो के माध्यम से किशोरियों को डराने और उन पर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, अभिभावकों की निगरानी और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। बाल कल्याण समिति ने अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने और उन्हें अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क करने के संभावित खतरों के बारे में जागरूक करने की अपील की है।
केस-1: रुद्रपुर की 14 वर्षीय किशोरी को केरल ले जाने का आरोप
रुद्रपुर की 14 वर्षीय नाबालिग से जुड़े मामले में इस वर्ष एक युवक पर उसे प्रेमजाल में फंसाकर केरल ले जाने का आरोप लगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वहां युवक ने कथित तौर पर उससे शादी की और उसके साथ दुष्कर्म किया।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर नाबालिग को बरामद किया। यह प्रकरण इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से बने संपर्क के बाद नाबालिगों को दूसरे राज्यों में ले जाने के मामलों में समय पर सूचना और पुलिस की कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
केस-2: वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और आठ अन्य युवकों पर दुष्कर्म के आरोप
गदरपुर की 15 वर्षीय किशोरी से जुड़े एक अन्य मामले में एक युवक पर उसकी सहेली के माध्यम से संपर्क करने का आरोप है। आरोप के मुताबिक, किशोरी को बहाने से एक कमरे में बुलाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया और कथित तौर पर वीडियो बना लिया गया।
इसके बाद वीडियो के माध्यम से किशोरी को ब्लैकमेल कर अलग-अलग स्थानों पर बुलाए जाने का आरोप है। मामले में आठ अन्य युवकों पर भी उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप सामने आए। CWC से मिली जानकारी के अनुसार, किशोरी के पिता उसे तलाश कर वापस लाए।
यह मामला दर्शाता है कि किसी की निजी तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल डराने, दबाव बनाने अथवा शोषण के लिए किए जाने की आशंका को गंभीरता से लेना जरूरी है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों की सुरक्षा, गोपनीयता और समय पर सहायता सुनिश्चित करना विशेष महत्व रखता है।
केस-3: फर्जी सोशल मीडिया आईडी से दोस्ती, चंडीगढ़ ले जाने का आरोप
मार्च में सामने आए एक अन्य मामले में गदरपुर की 15 वर्षीय किशोरी से एक युवक ने कथित तौर पर दूसरे नाम से बनाई गई सोशल मीडिया आईडी के जरिए दोस्ती की। आरोप है कि इसके बाद युवक किशोरी को चंडीगढ़ ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
मामले में पुलिस ने किशोरी को बरामद कर आरोपी युवक को गिरफ्तार किया। इस प्रकरण में सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान के जरिए नाबालिग से संपर्क स्थापित करने और बाद में उसे दूसरे शहर ले जाने के आरोप सामने आए।
हर महीने सामने आ रहे चार से पांच मामले
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. रत्नेश सिंह के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए नाबालिगों से संपर्क करने, उन्हें बहला-फुसलाकर घर से बाहर ले जाने और बाद में शोषण के आरोपों से जुड़े चार से पांच मामले हर महीने समिति के सामने पहुंच रहे हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क करने के खतरों के बारे में समझाएं। बच्चों को यह भी बताया जाना चाहिए कि ऑनलाइन किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना क्यों जरूरी है और किसी भी तरह के दबाव, धमकी या अनुचित व्यवहार की स्थिति में भरोसेमंद वयस्क से मदद लेना क्यों महत्वपूर्ण है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सतर्कता जरूरी
सोशल मीडिया बच्चों के लिए संवाद और जानकारी का माध्यम है, लेकिन फर्जी पहचान, निजी सामग्री के दुरुपयोग और ऑनलाइन संपर्क के बाद मिलने के लिए दबाव बनाने जैसी स्थितियां गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। ऐसे में बच्चों को केवल मोबाइल इस्तेमाल करने से रोकना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की जानकारी देना भी जरूरी है।
अभिभावकों को बच्चों के साथ ऐसा भरोसेमंद माहौल बनाए रखना चाहिए, जिसमें वे किसी अनजान व्यक्ति से हुई बातचीत, धमकी, ब्लैकमेलिंग या अनुचित व्यवहार की जानकारी बिना डर के साझा कर सकें। यदि कोई व्यक्ति निजी तस्वीर या वीडियो के जरिए धमकी देता है, तो बच्चे को दोष देने या शर्मिंदा करने के बजाय उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और पुलिस अथवा संबंधित बाल संरक्षण एजेंसी से संपर्क करना चाहिए।
ऊधम सिंह नगर में CWC के सामने पहुंच रहे मामले ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित करते हैं। बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से परिचित कराने, अभिभावकों को संवेदनशील बनाने और शिकायत मिलने पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने से ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।