रामनगर। मानसून सीजन के बीच रामनगर वन प्रभाग ने पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को राहत देते हुए टेड़ा-भण्डारपानी PWD मार्ग पर सीमित पर्यटन गतिविधियों को मंजूरी दी है। वन विभाग के आदेश के मुताबिक, 14 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक इस मार्ग पर पर्यटन जिप्सियों का संचालन किया जा सकेगा। हालांकि, हर जिप्सी के साथ पंजीकृत और प्रशिक्षित नेचर गाइड का होना अनिवार्य रहेगा।

रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मानसून के दौरान पर्यटकों को निर्धारित मार्ग पर ही भ्रमण कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को रोजगार का अवसर देने के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के नियमों को बनाए रखना है।
हर जिप्सी में नेचर गाइड अनिवार्य
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक जिप्सी के साथ पंजीकृत और प्रशिक्षित नेचर गाइड की मौजूदगी जरूरी होगी। गाइड पर्यटकों को जंगल, वन्यजीवों और कॉर्बेट लैंडस्केप की जैव विविधता से परिचित कराएंगे।
नेचर गाइड के लिए 1,000 रुपये प्रति चक्कर शुल्क निर्धारित किया गया है। यह राशि पर्यटकों को सीधे गाइड को देनी होगी।
450 रुपये होगा सफारी परमिट शुल्क
निर्धारित मार्ग पर जिप्सी सफारी के लिए 450 रुपये परमिट शुल्क देना होगा। पर्यटकों या जिप्सी संचालकों को यह शुल्क टेड़ा चौकी पर ऑफलाइन जमा करना होगा।
वन विभाग ने कहा है कि नियमों का पालन करना जिप्सी चालक, जिप्सी स्वामी और पर्यटकों की जिम्मेदारी होगी। नियम तोड़ने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सितावनी और पवलगढ़ जोन में नहीं मिलेगी एंट्री
टेड़ा-भण्डारपानी क्षेत्र के आसपास सितावनी, भण्डारपानी और पवलगढ़ पर्यटन जोन आते हैं। मानसून के दौरान इन पर्यटन जोन में सामान्य सफारी गतिविधियां बंद रहती हैं और आमतौर पर एक अक्टूबर से पर्यटन फिर शुरू होता है।
डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया ने साफ किया है कि मानसून अवधि में मिली यह अनुमति केवल टेड़ा-भण्डारपानी PWD मार्ग के लिए है। जिप्सियां किसी भी पर्यटन जोन के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगी।
पर्यटन कारोबारियों को मिलेगा सहारा
वन विभाग के इस फैसले से जिप्सी चालक, जिप्सी मालिक और नेचर गाइड समेत पर्यटन से जुड़े लोगों को मानसून के दौरान भी रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं, पर्यटकों को प्रशिक्षित गाइड के माध्यम से जंगल और वन्यजीवों की जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सीमित पर्यटन गतिविधियों के दौरान निर्धारित मार्ग, परमिट और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का पालन अनिवार्य होगा।