

मुख्यमंत्री मंगलवार को गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के लगभग 26 वर्षों में उत्तराखण्ड ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसमें राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, प्रदेशवासियों की मेहनत और जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में उत्तराखण्ड भी अपना योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
3.82 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है प्रदेश का जीएसडीपी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। वर्ष 2022 में उत्तराखण्ड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जिसके वर्ष 2026-27 में बढ़कर 3.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय भी लगभग 1.95 लाख रुपये से बढ़कर 2.74 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि राज्य में बहुआयामी गरीबी में कमी आई है। प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,978 हो गई है, जबकि एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 60 हजार से बढ़कर एक लाख तक पहुंच गई है। सौर ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखण्ड ने 79 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान हासिल किया। निवेश अनुकूलता और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचाना है।
स्थानीय निकायों को मिलेंगे अतिरिक्त संसाधन
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में कुल 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण और शहरी निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
किसानों, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट में प्रावधान
मुख्यमंत्री के अनुसार, किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए अन्नपूर्ति योजना के तहत 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये और जल जीवन मिशन के लिए 300 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये तथा आगामी दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 290 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। बजट में नंदा राजजात यात्रा और हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर से जुड़े कार्यों को भी महत्व दिया गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए अटल आयुष्मान योजना में 100 करोड़ रुपये और कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज सहित चिकित्सा शिक्षा से संबंधित कार्यों के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
विद्यालयी और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देने वाली मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना, खेल विश्वविद्यालय, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी ध्यान दिया गया है।
महिला एवं बाल कल्याण, पोषण अभियान, भोजन माताओं के मानदेय, किसान पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है।
आपदा प्रबंधन और रोजगार के अवसरों पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन और सुरक्षित आधारभूत ढांचे का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। जोशीमठ सहित भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों के साथ आपदा रोधी निर्माण, सड़क सुविधाओं और हेली सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि देहरादून में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया का परिसर स्थापित किया गया है। इससे प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और रोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी।
बजट निर्माण में जनभागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समय पर आम जनता तक पहुंचाना भी है। इसी दिशा में पिछले पांच वर्षों से बजट पूर्व संवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग के साथ राजस्व अधिशेष की स्थिति बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2035 तक समृद्ध उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण निवेश, स्थानीय रोजगार, बेहतर जनसेवाओं और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की प्रगति प्रदेशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। जनभागीदारी, सुशासन और निरंतर विकास के माध्यम से ही विकसित एवं आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।