नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार (S&T) विभाग के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकॉम मेंटेनर्स यूनियन (IRSTMU) के बैनर तले 24 जून को देशभर में “डिमांड डे” मनाया जाएगा। इस दौरान कर्मचारी रेलवे प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं और सुरक्षा संबंधी मुद्दों की ओर आकर्षित करेंगे। यूनियन का आरोप है कि वर्षों से कर्मचारियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि विभाग के कर्मचारी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे माहौल में काम करने को मजबूर हैं।

सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों को लेकर बढ़ी चिंता
S&T विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम और लेवल क्रॉसिंग गेटों के रखरखाव के दौरान उन्हें लगातार जोखिम का सामना करना पड़ता है। कई बार सिग्नल फेल होने की स्थिति में कर्मचारियों को तय ड्यूटी समय समाप्त होने के बाद भी तत्काल बुला लिया जाता है।
यूनियन का दावा है कि ड्यूटी रोस्टर और विश्राम अवधि से जुड़े नियमों का कई जगहों पर सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता के साथ-साथ रेलवे संचालन और यात्रियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से बढ़ा असंतोष
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर कई बार रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं। बावजूद इसके अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
IRSTMU के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने कहा कि कर्मचारियों ने संवाद और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि “डिमांड डे” के माध्यम से कर्मचारी अपनी आवाज एकजुट होकर उठाएंगे और रेलवे प्रशासन से लंबित मुद्दों के समाधान की मांग करेंगे।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है।
यूनियन नेताओं ने संकेत दिया है कि भविष्य में “टूल डाउन” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं, जिसके तहत कर्मचारी निर्धारित समय के लिए काम रोककर विरोध दर्ज कराएंगे।
बढ़ते काम के दबाव से जूझ रहे कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में स्टाफ की कमी के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ गई हैं। अनियमित कार्य घंटे और लगातार बढ़ते दबाव के चलते कई कर्मचारी तनाव, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
यूनियन का दावा है कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का बोझ भी अधिक है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
रिस्क और हार्डशिप अलाउंस की मांग दोहराई
कर्मचारियों ने जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने वाले S&T स्टाफ के लिए रिस्क और हार्डशिप अलाउंस लागू करने की मांग भी उठाई है। यूनियन का कहना है कि इस संबंध में गठित समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है, लेकिन अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है।
यूनियन नेताओं ने उम्मीद जताई कि रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द समाधान निकालेंगे।
फिलहाल 24 जून को होने वाले “डिमांड डे” को लेकर देशभर के रेलवे सिग्नल एवं टेलीकॉम कर्मचारियों में व्यापक तैयारी और उत्साह देखा जा रहा है।