देहरादून/ऋषिकेश:
उत्तराखंड को आधुनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की तैयारी चल रही है। देश के तेजी से विस्तार कर रहे नमो भारत रैपिड रेल नेटवर्क को उत्तराखंड तक पहुंचाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रस्ताव के तहत दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का विस्तार मेरठ के मोदीपुरम से ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला तक किया जा सकता है। यदि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली और उत्तराखंड के बीच यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।

मेरठ से ऋषिकेश तक 150 किमी विस्तार का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को मेरठ के मोदीपुरम से लगभग 150 किलोमीटर आगे बढ़ाकर ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला तक ले जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तराखंड सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के बीच प्रारंभिक स्तर पर सहमति बनी है। हालांकि, परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अभी तैयार की जानी है और अंतिम स्वीकृति मिलना शेष है।
सराय काले खां बनेगा रैपिड रेल का प्रमुख हब
प्रस्तावित योजना के अनुसार, दिल्ली का सराय काले खां स्टेशन नमो भारत रैपिड रेल नेटवर्क का सबसे बड़ा इंटरचेंज हब बनेगा। यहां से मेरठ, अलवर और पानीपत सहित कई प्रमुख कॉरिडोर संचालित होंगे। भविष्य में इस नेटवर्क का विस्तार उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान तक किए जाने की भी योजना है।
इन प्रस्तावित कॉरिडोरों पर भी चल रहा काम
नमो भारत परियोजना के तहत कई अन्य महत्वपूर्ण कॉरिडोर भी प्रस्तावित हैं—
- दिल्ली–गुरुग्राम–अलवर कॉरिडोर का विस्तार।
- दिल्ली–पानीपत (103 किमी) कॉरिडोर, जो दिल्ली को सोनीपत और पानीपत के औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ेगा।
- गाजियाबाद–जेवर (72.44 किमी) कॉरिडोर, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचेगा। इस मार्ग पर 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से और अधिक मजबूत होगी।
पर्यटन और चारधाम यात्रा को मिलेगा बढ़ावा
ऋषिकेश तक नमो भारत रैपिड रेल पहुंचने से उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इससे चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को नई गति मिल सकती है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर से आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।
अभी प्रस्तावित चरण में है परियोजना
फिलहाल यह परियोजना प्रारंभिक प्रस्ताव के स्तर पर है। डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार होने और केंद्र सरकार व संबंधित एजेंसियों से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। ऐसे में अभी इसे एक प्रस्तावित योजना के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो यह उत्तराखंड की परिवहन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।