चमोली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के दुर्गम और बर्फीले इलाकों में चल रहे जनगणना कार्य का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में जनगणना की शुरुआत सीमांत गांव माणा से हुई, जहां सबसे पहले 83 वर्षीय पूर्णिमा देवी की जनगणना की गई। प्रधानमंत्री ने जनगणना को देश के प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व बताया।

83 की उम्र में भी स्वरोजगार से जुड़ी हैं पूर्णिमा देवी
माणा निवासी पूर्णिमा देवी उम्र के इस पड़ाव में भी आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। बदरीनाथ धाम की यात्रा के दौरान वह गांव के पांडव चौक के समीप दुकान लगाकर स्थानीय उत्पाद बेचती हैं। उनकी दुकान पर फरण, ग्रीन टी और ऊनी उत्पाद उपलब्ध रहते हैं।
पूर्णिमा देवी का यह प्रयास न केवल उन्हें स्वरोजगार से जोड़ता है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक आजीविका को बढ़ावा देने में भी योगदान देता है।
परिवार के सदस्य भी अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय
पूर्णिमा देवी के तीन बेटे हैं। उनके एक बेटे केदार सिंह रावत आईटीबीपी से सेवानिवृत्त होने के बाद देहरादून में नौकरी कर रहे हैं। दूसरे बेटे नंदन सिंह ठेकेदारी से जुड़े हैं, जबकि तीसरे बेटे कुमेर सिंह रावत ट्रेकिंग संस्था का संचालन करते हैं।
ग्राम प्रधान धर्मेंद्र चौहान के अनुसार, माणा गांव की कई बुजुर्ग महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ी हैं और स्थानीय स्तर पर अपनी आजीविका चला रही हैं।
स्थानीय उत्पादों को मिली नई पहचान
माणा को देश के सीमांत और महत्वपूर्ण गांवों में प्रमुख पहचान मिली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के उत्पादों और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से यहां के पारंपरिक उत्पादों को व्यापक पहचान मिली है।
पूर्णिमा देवी की कहानी इसी बदलाव की एक झलक है, जहां उम्र की परवाह किए बिना स्थानीय महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।