हरिद्वार। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिल्ली में चल रहे सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बिना स्पष्ट नेतृत्व वाले आंदोलन अक्सर अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं और इससे देश एवं समाज को नुकसान होता है।
हरिद्वार पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ऐसे आंदोलनों का कोई निश्चित मार्गदर्शक नहीं होता, जिसके कारण यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि इनकी दिशा क्या होगी।
बिना नेतृत्व के आंदोलन नहीं पहुंचते सकारात्मक निष्कर्ष तक’
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अब तक इस तरह के जितने भी आंदोलन हुए हैं, वे किसी सकारात्मक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सके। उनका कहना था कि ऐसे आंदोलनों का सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ता है, जिनके नाम पर आंदोलन किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि नेतृत्वहीन आंदोलन लंबे समय तक नहीं चल पाते और अंततः देश तथा समाज को नुकसान पहुंचाते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब तक मेरे पास पूरी जानकारी नहीं होगी, तब तक मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।”
संसद नहीं चलने के लिए विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे पर भी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन विपक्ष के अड़ियल रुख के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।
उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष ने भी कई बार विपक्ष से सदन चलाने की अपील की, लेकिन विपक्ष चर्चा के बजाय व्यवधान की राजनीति करता रहा।
परीक्षा प्रणाली पर भी रखी राय
परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों पर बोलते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि परीक्षाएं एक स्वतंत्र संस्था के माध्यम से कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित मामलों में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है, लेकिन छात्रों की भावनाओं और नेतृत्व की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।