
देहरादून: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अंकिता के माता-पिता ने 14 अक्टूबर की शाम दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देकर न्याय की मांग उठाई। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनसे मिलने पहुंचे। बाद में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी धरनास्थल पर पहुंचे। घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस ने बुधवार तड़के करीब चार बजे अंकिता के परिजनों को हिरासत में ले लिया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। परिजनों की मांग है कि मामले में कथित VIP की भूमिका को लेकर चल रही CBI जांच पूरी होने तक उनकी राज्यपाल पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया रोक दी जाए। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर इस मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तराखंड में इस मुद्दे का राजनीतिक असर भी चर्चा का विषय बन गया है।
क्यों धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता?
अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में CBI जांच चल रही है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही उस व्यक्ति को राज्यपाल पद पर नियुक्त किए जाने की बात सामने आई है, जिसे परिवार कथित VIP के रूप में देख रहा है।
परिवार की मांग है कि संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया पर जांच पूरी होने तक रोक लगाई जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। अंकिता के पिता ने राष्ट्रपति से भी न्याय की गुहार लगाई।
वहीं, अंकिता की मां सोनी देवी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रपति स्वयं एक महिला हैं और उन्हें एक मां के दर्द को समझना चाहिए। उन्होंने भी मांग की कि कथित VIP की नियुक्ति प्रक्रिया CBI जांच पूरी होने तक रोक दी जाए।
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया।
उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे – बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।
कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे।
जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो।पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी।
कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी – जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।#JusticeForAnkitaBhandari
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 15, 2026
कैसे सामने आया कथित VIP का नाम?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका को लेकर विवाद दिसंबर 2025 में उस समय फिर तेज हुआ, जब उत्तराखंड भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो साझा किया। यह ऑडियो कथित तौर पर सुरेश राठौर के साथ बातचीत का था, जिसमें एक VIP का जिक्र होने का दावा किया गया।
उर्मिला सनावर ने दावा किया था कि संबंधित व्यक्ति भाजपा संगठन से जुड़ा है। हालांकि, कथित VIP की भूमिका और उससे जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकती है।
ऑडियो सामने आने के बाद उत्तराखंड में नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और मामले की CBI जांच की मांग तेज हो गई। परिजनों की मांग और बढ़ते जनदबाव के बीच राज्य सरकार ने जनवरी 2026 में मामले की CBI जांच के आदेश दिए।
चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम ज़रूर मिला।
जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है – उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती।
आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, India Gate पर बैठे हैं।
मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं – उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।
#JusticeForAnkitaBhandari
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 14, 2026
अब कथित VIP की भूमिका को लेकर चल रही जांच के बीच राज्यपाल पद पर नियुक्ति की खबर ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
क्या राज्यपाल को आपराधिक मामलों में पूरी छूट मिलती है?
इस विवाद में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 का भी उल्लेख किया जा रहा है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल को पद पर रहते हुए कुछ संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हैं।
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- अनुच्छेद 361(2): राष्ट्रपति या राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध किसी आपराधिक मुकदमे को शुरू या जारी नहीं रखा जा सकता।
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- अनुच्छेद 361(3): कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति या राज्यपाल की गिरफ्तारी या कारावास के लिए कोई प्रक्रिया जारी नहीं की जा सकती।
हालांकि, इन प्रावधानों को जांच से पूरी तरह छूट के समान नहीं माना जाना चाहिए। राज्यपाल को हर प्रकार की जांच से स्वतः पूर्ण सुरक्षा मिलने का दावा भी सही नहीं है। संवैधानिक संरक्षण की सीमा और जांच की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
राज्यपाल का पद छोड़ने के बाद आपराधिक आरोपों के संबंध में सामान्य कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार खुला रह सकता है। इसलिए इस मामले में नियुक्ति और जांच के संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर ही तय होगी।
दिल्ली: अंकिता भंडारी मामले पर मृतक अंकिता भंडारी के पिता ने कहा, “मेरी बेटी की हत्या 18 सितंबर, 2022 को हुई थी। तीन आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई, लेकिन मुख्य आरोपी एक VIP था जो उसकी हत्या के लिए ज़िम्मेदार था। निचली अदालत में सुनवाई के दौरान, हमने बार-बार कहा कि मेरी बेटी की हत्या एक VIP की वजह से हुई थी।”
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 14, 2026
राहुल गांधी ने भाजपा पर साधा निशाना
अंकिता हत्याकांड को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता के परिवार को लंबे समय से न्याय नहीं मिला, जबकि कथित VIP को संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने की खबर सामने आई है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में भाजपा पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अंकिता के परिवार के साथ खड़ी है और न्याय की लड़ाई में उनका समर्थन करती रहेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भी परिजनों के धरने तथा पुलिस हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग लेकर दिल्ली पहुंचे माता-पिता की पीड़ा को समझा जाना चाहिए। रावत ने इसे पूरे उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि अंकिता के लिए न्याय की लड़ाई केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं है।
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंकिता उत्तराखंड की बेटी है और कांग्रेस उसके लिए संघर्ष जारी रखेगी। गोदियाल ने कथित VIP को राज्यपाल पद पर नियुक्त किए जाने को उत्तराखंड की भावनाओं का अपमान बताया।
भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। भाजपा पहले भी कहती रही है कि अंकिता हत्याकांड में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है और अब CBI जांच के माध्यम से मामले के अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
इस विवाद में भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है। हालांकि, कथित VIP की भूमिका को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही मिल सकेगा।
बेटी के लिए न्याय मांगने दो अदत अर्थात मां-बाप इंडिया गेट पहुंचे। व्यथा थी कि जिस व्यक्ति को वो अपनी बेटी का हत्यारा मानते हैं या हत्या का कारक मानते हैं, उसे जेल की शिकंजों के बजाय राजभवन में सम्मान दिया जा रहा है। राजभवन में बिठाकर सम्मान दिया जा रहा है। रात के अंधेरे में सत्ता ने माता-पिता की व्यथा सुनने के बजाय उन्हें इंडिया गेट से पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मगर सत्ता याद रखें आज अंकिता के मां-बाप अकेले दो ही व्यक्ति नहीं हैं बल्कि सारे उत्तराखंड के मां-बाप, अंकिता के मां-बाप हैं। सारे भाई, अंकिता के भाई हैं।
न्याय की लड़ाई लंबी चलेगी। मगर अनंतोगत्वा सत्य की जीत होगी। सत्यमेव जयते🇮🇳🇮🇳
#JusticeForAnkitaBhandari #AnkitaBhandari #Uttarakhand #SatyamevJayate #JusticeForDaughters
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) October 15, 2026
विधानसभा चुनाव से पहले कितना बड़ा मुद्दा बनेगा अंकिता मामला?
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों पर इसके संभावित असर की चर्चा भी तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकार भगीरथ शर्मा के अनुसार, राहुल गांधी के दिल्ली में धरनास्थल पर पहुंचने से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता मिली है। उनका मानना है कि इसका असर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में देखने को मिल सकता है। हालांकि, भाजपा लगातार यह कहती रही है कि उसने मामले में जरूरी कार्रवाई की है और CBI जांच भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडे का मानना है कि गढ़वाल क्षेत्र में यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से मामले की जांच और न्याय की मांग उठाती रही है और अब कथित VIP की भूमिका को लेकर विवाद ने भाजपा पर राजनीतिक दबाव बढ़ाया है।
फिलहाल, इस मामले का चुनावी असर कितना व्यापक होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि अंकिता के परिवार की न्याय की मांग और कथित VIP की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है।
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राजभवन पहुँचे कांग्रेसजन। https://t.co/69NNPKK9xN
— Uttarakhand Congress (@INCUttarakhand) October 15, 2026
अंकिता भंडारी हत्याकांड: अब तक की प्रमुख घटनाएं
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- अगस्त 2022: अंकिता भंडारी ने पौड़ी जिले के गंगा-भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम शुरू किया।
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- 18 सितंबर 2022: अंकिता रिजॉर्ट से लापता हुई।
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- 19-20 सितंबर 2022: परिवार ने उसकी गुमशुदगी की सूचना दी और मामला दर्ज हुआ।
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- 22 सितंबर 2022: मामला नियमित पुलिस को सौंपा गया और जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया।
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- 23 सितंबर 2022: पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। इसी दौरान वनंत्रा रिजॉर्ट में बुलडोजर कार्रवाई भी हुई।
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- 24 सितंबर 2022: अंकिता का शव चीला नहर से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम में डूबने से मौत की पुष्टि हुई।
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- दिसंबर 2022: पुलिस ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया।
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- मार्च 2023: कोटद्वार की अदालत में आरोप तय किए गए।
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- 30 मई 2025: कोटद्वार अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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- दिसंबर 2025: उर्मिला सनावर द्वारा साझा किए गए कथित ऑडियो के बाद VIP की भूमिका को लेकर विवाद फिर तेज हुआ।
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- जनवरी 2026: राज्य सरकार ने मामले की CBI जांच के आदेश दिए।
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- 14 अक्टूबर 2026: अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देकर न्याय की मांग उठाई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी उनसे मिलने पहुंचे।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को सजा सुनाए जाने के बावजूद कथित VIP की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब सबकी निगाहें CBI जांच के निष्कर्षों और परिजनों की मांग पर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।