

क्षेत्रीय दलों की एकजुटता पर जोर
देहरादून स्थित जिला पंचायत भवन में रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों को एक मंच पर लाकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए साझा रणनीति की संभावनाएं तलाशना था। बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य आंदोलनकारियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न जनसंगठनों के सदस्यों ने भी अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने के लिए क्षेत्रीय दलों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना होगा। बैठक में आपसी समन्वय बढ़ाने, संवाद जारी रखने और प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख अपनाने की जरूरत पर बल दिया गया।
प्रतिभागियों ने आगामी चुनाव में एक प्रभावी क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ने की मंशा जताई। हालांकि, इस पहल का चुनावी असर गठबंधन की औपचारिक घोषणा, नेतृत्व और संयुक्त रणनीति पर निर्भर करेगा।
इन 14 दलों और संगठनों ने लिया हिस्सा
‘मंथन 2027’ कार्यक्रम में उत्तराखंड क्रांति दल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, स्वाभिमान मोर्चा, राष्ट्रीय रिजनल पार्टी, समानता पार्टी, हिमालय क्रांति पार्टी, विकास पार्टी, राज्य आंदोलनकारी मंच, पूर्व सैनिक अर्धसैनिक संयुक्त सैनिक संगठन, बेरोजगार संघ, देवभूमि फाउंडेशन, पहाड़ स्वाभिमान सेना, गढ़-कुमाऊं एलायंस और कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में इन संगठनों ने स्थानीय अधिकारों, क्षेत्रीय अस्मिता और प्रदेश से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई। अब इन दलों के सामने साझा एजेंडे पर सहमति बनाने और उसे चुनावी रणनीति में बदलने की चुनौती होगी।
‘मेरी जमीन, मेरा अभिमान’ अभियान चलाएगा उक्रांद
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल ने जमीन और भू-कानून से जुड़े मुद्दों पर ‘मेरी जमीन, मेरा अभिमान’ अभियान शुरू करने की घोषणा की। पार्टी के अनुसार, अभियान के जरिए लोगों को भू-कानून से संबंधित प्रावधानों के प्रति जागरूक किया जाएगा और पुश्तैनी जमीन से जुड़े मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उक्रांद अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने कहा कि राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने स्थानीय लोगों की जमीनों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया।
कुकरेती के मुताबिक, भविष्य में राज्य के मूल निवासी भूमिहीन न हों, इसके लिए पार्टी जनसंपर्क और जागरूकता अभियान चलाएगी। उक्रांद जमीन, मूल निवास और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रदेश की राजनीति में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।
मूल निवास, भू-कानून और बेरोजगारी पर चर्चा
बैठक में उत्तराखंड के प्रमुख सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इनमें मूल निवास, सशक्त भू-कानून, जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकार, पलायन, बेरोजगारी और परिसीमन जैसे विषय शामिल रहे।
वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय जनता के अधिकारों की रक्षा और क्षेत्रीय हितों को प्राथमिकता देने के लिए ठोस पहल जरूरी है। इन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने के लिए क्षेत्रीय दलों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया।
क्या भाजपा और कांग्रेस के सामने बनेगा तीसरा विकल्प?
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले क्षेत्रीय दलों की एकजुटता की यह पहल राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना पैदा करती है। यदि क्षेत्रीय दल साझा न्यूनतम कार्यक्रम, नेतृत्व और सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो वे भाजपा और कांग्रेस के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच पेश कर सकते हैं।
हालांकि, इस संभावित गठबंधन की वास्तविक ताकत कई पहलुओं पर निर्भर करेगी। इनमें दलों के बीच आपसी तालमेल, चुनावी क्षेत्रों में उनकी पकड़, नेतृत्व को लेकर सहमति और मतदाताओं का समर्थन प्रमुख हैं।
फिलहाल, देहरादून में हुई बैठक क्षेत्रीय एकता की दिशा में शुरुआती पहल है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि ‘मंथन 2027’ की यह कवायद औपचारिक गठबंधन में बदलती है या नहीं और आगामी विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय दल किस रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं।