

30 अक्टूबर को पेश करनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर मामले से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट दाखिल करने से पहले उसकी एक-एक प्रति सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे दस्तावेजों का उचित तरीके से अवलोकन कर सकें।
मामले में दायर याचिकाओं में कहा गया है कि निर्धारित सजा पूरी होने के बावजूद संबंधित कैदियों को जेलों से रिहा नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
जेलों में मिले थे सजा पूरी कर चुके 167 कैदी
मामले में पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिए थे कि सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई से संबंधित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
बताया गया कि इन निर्देशों का पालन नहीं होने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया और जेलों का दौरा भी किया। इस दौरान अदालत के संज्ञान में 167 ऐसे कैदियों का मामला आया, जिनकी सजा पूरी हो चुकी थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वे जेलों में बंद थे।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने कुछ कैदियों को रिहा किया। हालांकि, शेष कैदियों की रिहाई का मामला अभी भी विचाराधीन है।
कैदियों के व्यवहार और मानसिक स्थिति का आकलन कर रहा जेल प्रशासन
सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित कैदियों के जेल में बिताए गए समय, उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिहाई के बाद कैदी सामान्य नागरिक की तरह जीवन व्यतीत कर सकें।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी निर्धारित सजा पूरी हो चुकी है और इसके बावजूद उन्हें जेल में रखा जाना उचित नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई गई है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
सजा पूरी होने के बाद भी कैदियों के जेल में बंद रहने का मामला न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर मामले में आगे की कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने को कहा है।
अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।