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विधानसभा सत्र को आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सरकार के सामने अनुपूरक बजट और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था और जोशीमठ आपदा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसी बीच, ग्राम प्रधानों ने भी अपनी लंबित मांगों को लेकर भराड़ीसैंण में विधानसभा घेराव का कार्यक्रम रखा है।
सुबह 11 बजे वंदे मातरम के साथ शुरू होगी कार्यवाही
विधानसभा की ओर से जारी कार्यसूची के अनुसार, सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे वंदे मातरम के साथ शुरू होगी। इसके बाद दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने से संबंधित कार्यवाही होगी। दोपहर 3 बजे से वित्तीय और विधायी कामकाज आगे बढ़ेगा।
पहले दिन सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुपूरक अनुदान मांगें प्रस्तुत की जाएंगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों से संबंधित अध्यादेशों, विधेयकों और रिपोर्टों को सदन के पटल पर रखने का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है।
धामी सरकार पेश करेगी अनुपूरक बजट
सत्र के पहले दिन की सबसे महत्वपूर्ण कार्यवाही अनुपूरक बजट की प्रस्तुति होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सदन में अनुपूरक अनुदान मांगें पेश करेंगे। इसके माध्यम से सरकार चालू वित्तीय वर्ष के स्वीकृत बजट से अतिरिक्त आवश्यक खर्चों के लिए विधानसभा की मंजूरी मांगेगी।
सरकार की ओर से अतिरिक्त धनराशि का उपयोग विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए किए जाने की संभावना है। हालांकि, विधानसभा की जारी कार्यसूची में अनुपूरक बजट की कुल धनराशि का उल्लेख नहीं है। इसकी वास्तविक राशि सदन में प्रस्तुत विवरण से स्पष्ट होगी।
राज्य वित्त आयोग और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट भी होगी पेश
पहले दिन की कार्यवाही में छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट और उस पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण भी शामिल है। मुख्यमंत्री संविधान के अनुच्छेद 243(आई) और 243(वाई) तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखेंगे।
इसके अलावा उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2019-22 की वार्षिक एवं विशेष रिपोर्ट पर सरकार की कार्रवाई से संबंधित प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया जाएगा। विधानसभा की विभिन्न विशेषाधिकार समितियों की रिपोर्टों को भी सदन के सामने रखा जाना प्रस्तावित है।
इन दस्तावेजों के माध्यम से संबंधित संस्थाओं के कामकाज और उनकी सिफारिशों पर सरकार की कार्रवाई की जानकारी विधायकों को मिलेगी।
कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पुनर्स्थापित करने की तैयारी
विधानसभा की कार्यसूची में विभिन्न विधेयकों को सदन में पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया भी शामिल है। इनमें सिंचाई जल निकासी विधेयक, 2026, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026, निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 तथा जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) द्वितीय विधेयक, 2026 प्रमुख हैं।
इसके अतिरिक्त अल्पसंख्यक शिक्षा, सिविल विधि, अग्निशमन एवं आपात सेवा, माल और सेवा कर तथा निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े विधेयकों पर भी सदन में कार्यवाही प्रस्तावित है। संबंधित मंत्री नियमानुसार पहले विधेयकों को पुनर्स्थापित करने की अनुमति मांगेंगे और फिर उन्हें सदन में पुनर्स्थापित करेंगे।
विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति ने 24 अक्टूबर की बैठक में 27 अक्टूबर की कार्यवाही के लिए अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखने, अनुपूरक अनुदान मांगें प्रस्तुत करने और अन्य औपचारिक कार्यों की सिफारिश की थी। इसी के आधार पर पहले दिन का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के लिए अहम सत्र
राजनीतिक दृष्टि से इस सत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह धामी सरकार का आखिरी अनुपूरक बजट सत्र माना जा रहा है। ऐसे में सरकार के बजट और संभावित घोषणाओं पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
सत्र के दौरान सरकार की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को लेकर घोषणाएं किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। वहीं, विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था और जोशीमठ आपदा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। ऐसे में सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।
ग्राम प्रधानों का विधानसभा घेराव, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन
विधानसभा सत्र के बीच ग्राम प्रधानों के प्रस्तावित आंदोलन से भी गैरसैंण में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में ग्राम पंचायतों के अधिकारों में कटौती और लंबित मांगों के विरोध में ‘प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड’ ने 27 अक्टूबर को भराड़ीसैंण में विधानसभा घेराव का कार्यक्रम रखा है। संगठन को इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से हजारों ग्राम प्रधानों के शामिल होने की उम्मीद है।
प्रधान संगठन लंबे समय से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इससे पहले देहरादून में सचिवालय कूच के दौरान सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, संगठन का आरोप है कि लंबा समय बीतने के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है और संबंधित फाइलें शासन स्तर पर लंबित हैं।
मांगों पर कार्रवाई में देरी को लेकर ग्राम प्रधानों में नाराजगी है। संगठन का कहना है कि पंचायतों के अधिकारों और उनकी लंबित समस्याओं पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
सुरक्षा के मद्देनजर निषेधाज्ञा लागू
विधानसभा सत्र और प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं।
कुल मिलाकर, गैरसैंण में शुरू हो रहा दो दिवसीय विधानसभा सत्र वित्तीय और विधायी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। जहां सरकार अनुपूरक बजट और विधेयकों के जरिए अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेगी, वहीं विपक्ष और ग्राम प्रधानों के आंदोलन के बीच सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सबकी नजर रहेगी।