देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र को देश के 50 कचरा मुक्त शहरों में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत दोनों शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है।

मंत्रालय के अधिकारी अब देहरादून और हरिद्वार नगर निगम क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की प्रगति पर सीधे नजर रखेंगे। इसके लिए केंद्रीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को विशिष्ट शहरों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ये अधिकारी स्थानीय निकायों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में हैंडहोल्डिंग सपोर्ट भी उपलब्ध कराएंगे।
डिजिटल सिस्टम से होगी योजनाओं की मॉनिटरिंग
कचरा मुक्त शहरों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए योजनाओं की प्रगति की डिजिटल निगरानी की व्यवस्था भी तैयार की गई है। इसके तहत स्वच्छतम पोर्टल सहित डिजिटल समीक्षा प्रणाली के माध्यम से शहरों में चल रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी।
मंत्रालय का फोकस वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के स्रोत पर पृथक्करण और स्थानीय निकायों की क्षमता बढ़ाने पर है। इससे देहरादून और हरिद्वार जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्माण मलबे के निस्तारण पर भी जोर
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत मंत्रालय ने स्रोत पर ही कचरे के पृथक्करण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन एंड डिमॉलिशन (C&D) वेस्ट के लिए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित करने की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की गई है।
इन व्यवस्थाओं से निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे के वैज्ञानिक तरीके से संग्रह और निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद है। देहरादून और हरिद्वार में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार को देखते हुए C&D वेस्ट प्रबंधन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्हाट्सऐप के जरिए दर्ज होंगी सफाई संबंधी शिकायतें
नागरिकों के लिए स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है। मंत्रालय ने स्वच्छता एप को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक समर्पित व्हाट्सऐप चैनल शुरू किया है।
इसके माध्यम से देहरादून और हरिद्वार के नागरिक अपने मोबाइल फोन से कचरे, गंदगी और स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे।
जनजागरूकता के लिए डिजिटल कोष
स्वच्छता को लेकर नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए स्वच्छता बिहेवियर चेंज डिजिटल कोष भी लॉन्च किया गया है। इसके माध्यम से स्थानीय निकायों को जनजागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रचार सामग्री और नए प्रयोगों के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
केंद्र की नई व्यवस्था के तहत देहरादून और हरिद्वार में कचरा प्रबंधन की निगरानी, तकनीकी सहयोग और नागरिक शिकायतों के समाधान को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।