देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आगामी चुनाव को लेकर अपने बेटे आनंद रावत की राजनीतिक भूमिका पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि उनकी दिली ख्वाहिश है कि आनंद रावत चुनावी मैदान में उतरें और उनकी ‘उत्तराखंडियत’ की सोच तथा उत्तराखंड से उनके रिश्ते को आगे बढ़ाएं।
एक बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह संकेत दिया है कि जिन सीटों पर पार्टी लंबे समय से चुनाव नहीं जीत पाई है और वहां कोई मजबूत दावेदार नहीं है, उन सीटों पर आनंद रावत को मौका दिया जा सकता है।

‘जिस सीट पर कांग्रेस लंबे समय से नहीं जीती, आनंद ने वही चुनी’
हरीश रावत के मुताबिक, आनंद रावत ने ऐसी सीट चुनी है, जिस पर कांग्रेस वर्ष 1984 से चुनाव नहीं जीत पाई है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि आनंद को भी राजनीतिक रूप से अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले।
रावत ने परिवारवाद के सवाल पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी सीट पर किसी अन्य दावेदार का हक बनता है तो केवल उनका बेटा होने के कारण आनंद को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आनंद का दावा मजबूत है और वह चुनाव जीतने की स्थिति में है, तभी पार्टी उसे मौका दे।
‘हर बार मैंने ही बेटे का अवसर काटा’
हरीश रावत ने कहा कि आनंद रावत को राजनीतिक अवसर देने की बात वह पहले भी कर चुके हैं, लेकिन कई मौकों पर उन्होंने स्वयं ही उसका अवसर रोका।
उन्होंने बताया कि जब आनंद यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब यूथ कांग्रेस के कई पदाधिकारियों को टिकट मिला था। आनंद ने लालकुआं से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने खुद वहां से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। उस समय पार्टी के भीतर हरीश दुर्गापाल के नाम की चर्चा थी।
रावत के मुताबिक, वर्ष 2017 में आनंद ने जसपुर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। हालांकि, उन्होंने पार्टी हित में भाजपा की चुनौती को देखते हुए आदेश चौहान को मजबूत प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारने का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने आनंद से कहा था कि उसका समय आएगा।
बेटी अनुपमा का भी किया जिक्र
हरीश रावत ने अपनी बेटी अनुपमा रावत का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी ऐसी सीट चुनी, जिस पर कांग्रेस लंबे समय से चुनाव नहीं जीत पाई थी। उन्होंने कहा कि अनुपमा ने हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ा, जहां कांग्रेस करीब 45 वर्षों से जीत दर्ज नहीं कर पाई थी।
रावत ने कहा कि पिछली बार वह स्वयं वहां से चुनाव हार गए थे, लेकिन अनुपमा इसके बावजूद राजनीतिक मैदान में बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहेगी तो वह मैदान में उतरेंगी।
‘मछली के बच्चे समुद्र में तैरना सीखें’
आने वाली पीढ़ी की राजनीतिक भूमिका पर हरीश रावत ने कहा, “यदि मछली के बच्चे समुद्र में तैरना नहीं जानेंगे तो खत्म हो जाएंगे। समुद्र तो अपनी जगह रहेगा, तैरना उनको ही है।”
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी उत्तराखंडियत की सोच और उत्तराखंड के साथ उनके रिश्ते को आगे बढ़ाने वाला कोई व्यक्ति तैयार हो। उनके मुताबिक, आनंद रावत में इसके लिए संभावनाएं हैं और वह चाहते हैं कि उसे भी अवसर मिले।
हालांकि, रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर टिकट नहीं मिलना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी सीट पर किसी अन्य दावेदार का हक बनता है तो उसे नजरअंदाज कर आनंद को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे ही अपने नजरिए से ‘परिवारवाद’ की सीमा बताया।