देहरादून: डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के बीच एनएसयूआई से जुड़े छात्र नेताओं के खिलाफ वारंट और गिरफ्तारी की कार्रवाई के विरोध में सोमवार देर रात कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रैली के रूप में एसएसपी आवास पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर मौके से हटाया। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन कार्यकर्ता धरने पर डटे रहे।
NSUI नेताओं ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई की स्थिति मजबूत होने के बीच छात्र नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उनका दावा है कि वारंट और गिरफ्तारी की कार्रवाई से चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है।
डीएवी पीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सौरभ सेमवाल ने कहा कि एनएसयूआई छात्र नेता विनीत प्रसाद भट्ट उर्फ बंटू भैया के खिलाफ वारंट जारी होने के साथ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सौरभ सेमवाल के मुताबिक, चुनाव के दौरान इस तरह की कार्रवाई से छात्र नेताओं और उनके समर्थकों में नाराजगी है।
एसएसपी आवास पर धरना, पुलिस ने हिरासत में लिया
एसएसपी आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन समाप्त करने और मौके से हटने के लिए समझाने का प्रयास किया। जब प्रदर्शनकारी धरने पर डटे रहे तो पुलिस ने कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस कार्यालय में जुटे कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच
घटना के बाद देर रात तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एनएसयूआई छात्र नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी रही। कांग्रेस नेता ज्योति रौतेला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर भी कूच किया।
एनएसयूआई से जुड़े सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया कि कई कार्यकर्ता कांग्रेस भवन में भी एकत्र हुए हैं। घटनाक्रम के चलते देहरादून में देर रात तक राजनीतिक और छात्र गतिविधियां जारी रहीं।
फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए राजनीतिक दबाव के आरोपों पर पुलिस और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।