नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने NEET 2026 को लेकर हुए GEN-Z के विरोध-प्रदर्शन और अपने इस्तीफे पर खुलकर बात की है। प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि GEN-Z को लेकर उनके मन में कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं थी और उन्होंने परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर पद छोड़ने की पेशकश की थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि मंत्री पद उनके लिए व्यक्तिगत रूप से जरूरी नहीं था। देश के युवाओं की उम्मीदें और उनका भविष्य इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
‘GEN-Z हमारे बच्चे हैं’
प्रधान ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि GEN-Z के युवाओं की अपनी आकांक्षाएं हैं और आने वाले समय में यही पीढ़ी भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने युवाओं को गुमराह करने का प्रयास किया। प्रधान के मुताबिक, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बनाया और प्रधानमंत्री के सामने खुद पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की।
रायराखोल में नवीन पटनायक पर निशाना
ओडिशा के रायराखोल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने बीजेडी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने बीजेडी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध और ‘गो बैक’ के नारों को लेकर कहा कि इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
एयरपोर्ट के पास बीजेडी की युवा और छात्र इकाइयों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं। अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तो वह वापस आने के लिए तैयार हैं।
प्रधान ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में युवाओं को इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी ऐसा काम किया है, जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया।
‘ओडिशा को बदनाम करने वाला कोई काम नहीं किया’
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने अपने काम के जरिए कभी ओडिशा की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाया। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य का नाम खराब हो।
प्रधान ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 12 साल पहले भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद से उन्हें केंद्रीय मंत्री बनने का अवसर मिला था।
विरोध के बीच कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ली सलाह
प्रधान ने बताया कि बीजेडी कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए उन्होंने बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा में उपनेता प्रसन्ना आचार्य से सलाह ली थी। उनके मुताबिक, प्रसन्ना आचार्य ने उन्हें कार्यक्रम में आने के लिए कहा और स्वागत का भरोसा दिया।
प्रधान ने कहा कि प्रसन्ना आचार्य की सहमति के बाद ही वह कार्यक्रम में शामिल हुए।
BJD का पलटवार, ‘छात्र आंदोलन से निपटने पर हुई आलोचना’
धर्मेंद्र प्रधान के आरोपों पर बीजेडी के संबलपुर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि किसी ने प्रधान को बदनाम करने की कोशिश नहीं की।
रोहित पुजारी ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन से निपटने के तरीके को लेकर प्रधान की आलोचना हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर नाराजगी थी।
पुजारी ने सवाल उठाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के लिए नवीन पटनायक को जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान के खिलाफ नाराजगी की वजह छात्रों के प्रदर्शन से निपटने का तरीका था, न कि उन्हें बदनाम करने की कोई राजनीतिक कोशिश।