देहरादून: विश्व बाघ दिवस के अवसर पर देहरादून में ‘सिंगल-यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाघ संरक्षण पर आधारित विशेष चित्र और पोस्टकार्ड का विमोचन किया तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान साहसिक कार्य करने और वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रभावी प्रतिबंध केवल सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने और उत्तराखंड को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाघ दिवस केवल वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने का अवसर नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि बाघ हमारी जैव विविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित वन क्षेत्र इस प्राकृतिक विरासत को मजबूती प्रदान करते हैं।
प्लास्टिक बना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए चुनौती
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक नदियों, जल स्रोतों, मिट्टी और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। जंगलों में फेंका गया प्लास्टिक कई बार वन्यजीवों के भोजन में मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और उसके प्रभावी प्रबंधन पर गंभीरता से काम करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विश्व बाघ दिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित “एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन” विषयक राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में सहभागिता कर बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया।
साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक कार्य करने तथा… pic.twitter.com/Ifvo8rJVWn
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 29, 2026
प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड के लिए सरकार के प्रयास
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी पालन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रही है। इसके साथ ही निरीक्षण और प्रवर्तन की कार्रवाई भी लगातार की जा रही है। चारधाम यात्रा मार्गों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। वहीं प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान, ‘एक पेड़ मां के नाम’, नमामि गंगे और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी पहल ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का काम किया है। राज्य सरकार भी इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ा रही है।
प्रदेश सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, प्लास्टिक मुक्त चारधाम यात्रा मार्गों एवं पर्यटन स्थलों के निर्माण तथा प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन और रीसाइक्लिंग को निरंतर बढ़ावा दे रही… pic.twitter.com/EO92rIJXiG
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 29, 2026
सभी वर्गों से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से कपड़े और जूट के थैलों सहित पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने चारधाम यात्रा और अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से भी प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक और अन्य कचरा न फैलाने की अपील की।
उन्होंने उद्योग जगत से पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, ग्राम सभाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित वन और संरक्षित वन्यजीव ही उत्तराखंड की सबसे बड़ी पूंजी हैं। इनके संरक्षण में समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।