देहरादून: मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के दम पर उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला निवासी प्रियांश सैनी ने पहले ही प्रयास में NEET 2026 में 614 अंक हासिल कर शानदार सफलता प्राप्त की है। किसान परिवार से आने वाले प्रियांश अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में प्रवेश लेकर न्यूरोलॉजिस्ट बनने का सपना साकार करना चाहते हैं।
वर्तमान में प्रियांश देहरादून के सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल (SBPS) के छात्र हैं। उनके पिता घनश्याम सैनी खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। प्रियांश का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे माता-पिता का संघर्ष, शिक्षकों का मार्गदर्शन और लगातार की गई मेहनत सबसे बड़ी ताकत रही है।

इंटीग्रेटेड प्रोग्राम से मिली सफलता
प्रियांश ने बताया कि 11वीं कक्षा में सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में प्रवेश लेने के बाद उन्होंने स्कूल के Integrated Education Program के तहत बोर्ड परीक्षा और NEET की तैयारी एक साथ शुरू की। नियमित अध्ययन, टेस्ट सीरीज और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया।
उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 94.8 प्रतिशत अंक भी हासिल किए। उनका कहना है कि स्कूल का अनुशासित वातावरण और शिक्षकों का व्यक्तिगत मार्गदर्शन उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता रहा।
AIIMS में पढ़ाई कर करना चाहते हैं समाज की सेवा
प्रियांश का सपना AIIMS से मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर Neurologist बनना है। उनका कहना है कि वह भविष्य में गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का इलाज कर समाज की सेवा करना चाहते हैं। साथ ही अपने किसान पिता की मेहनत और सपनों को साकार करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि उनके परिवार में शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। उनकी बड़ी बहन भी Combined Defence Services (CDS) परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
स्कूल प्रबंधन ने दी बधाई
बलूनी ग्रुप के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी ने प्रियांश की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि संस्थान का Integrated Education Model विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ NEET, JEE और NDA जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देता है।
उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाना है। प्रियांश की उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।