
![]()
सीडीओ से बहस के बाद सदन से बाहर निकले प्रधान
नारायणबगड़ में आयोजित बीडीसी बैठक में उस समय हंगामे की स्थिति पैदा हो गई, जब ग्राम प्रधान अपनी मांगों पर सुनवाई नहीं होने से नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। प्रधान संघ अध्यक्ष योगेंद्र सिंह खत्री के नेतृत्व में प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार किया।
ग्राम प्रधानों का आरोप है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं और मांगों को शासन-प्रशासन के समक्ष रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बैठक के दौरान सीडीओ डॉ. अभिषेक त्रिपाठी के साथ उनकी तीखी बहस हुई। वहीं, ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने कई बार मामले को सुलझाने और प्रधानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
मानदेय बढ़ाने और ग्राम प्रधान निधि बनाने की मांग
ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों में मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने और ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में शामिल होने वाले वार्ड सदस्यों को मानदेय देने की मांग प्रमुख है। इसके अलावा मनरेगा में ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा अकुशल श्रमिकों को 600 रुपये और कुशल श्रमिकों को 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग भी उठाई गई है।
प्रधानों ने राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि बढ़ाने के साथ विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके।
10 लाख तक के विकास कार्य ग्राम पंचायतों से कराने की मांग
ग्राम प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही पंचायत राज अधिनियम के तहत 29 विभागों के अधिकार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने, जिला योजना में प्रधान संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करने और ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कराने की मांग की गई है।
प्रधानों का कहना है कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों पर है, लेकिन पर्याप्त मानदेय, वित्तीय अधिकार और संसाधनों के अभाव में विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उनका मानना है कि पंचायतों को अधिक अधिकार और बजट मिलने से स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
ग्राम प्रधानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। साथ ही आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।
बैठक में हुए इस घटनाक्रम के बाद ग्राम प्रधानों और प्रशासन के बीच मांगों को लेकर गतिरोध सामने आया है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन की ओर से प्रधानों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और विवाद के समाधान के लिए आगे क्या पहल होती है।