

विधायक दुर्गेश्वर लाल का दावा है कि उनकी विधानसभा में विधायक निधि से सबसे अधिक धनराशि खर्च की गई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी घोषणाओं पर काम हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीण सड़कों, सिंचाई नहरों और पशुपालकों के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है।
2026-27 की 59 योजनाओं पर काम शुरू नहीं
विधानसभा क्षेत्र में पिछले चार वित्तीय वर्षों के दौरान कई योजनाएं पूरी हुई हैं, लेकिन कुछ योजनाएं अब भी निर्माणाधीन हैं। वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 93 योजनाओं में से 34 प्रगति पर हैं, जबकि 59 योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
वित्तीय वर्षवार योजनाओं की स्थिति इस प्रकार है:
- वर्ष 2022-23: कुल 218 योजनाओं में से 192 पूरी हुईं और 26 प्रगति पर हैं।
- वर्ष 2023-24: कुल 248 योजनाओं में से 201 पूरी हुईं और 47 पर काम जारी है।
- वर्ष 2024-25: कुल 235 योजनाओं में से 187 पूरी हुईं और 48 प्रगति पर हैं।
- वर्ष 2025-26: कुल 242 योजनाओं में से 192 पूरी हुईं और 50 अधूरी हैं।
- वर्ष 2026-27: कुल 93 योजनाओं में से 34 प्रगति पर हैं और 59 पर काम शुरू नहीं हुआ है।
इन आंकड़ों के अनुसार, पुरोला विधानसभा में स्वीकृत योजनाओं का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन शेष योजनाओं को धरातल पर उतारना अभी चुनौती बना हुआ है।
ग्रामीण सड़कें और सिंचाई नहरें बनीं चिंता का विषय
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुरोला में उपजिला चिकित्सालय के भवन का निर्माण तो हुआ है, लेकिन दूरदराज के गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। कई गांव आज भी खराब सड़कों की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं, किसानों के लिए महत्वपूर्ण सिंचाई नहरों का निर्माण और रखरखाव भी चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्रामीण श्यालिक राम नौटियाल का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी घोषणाओं पर काम हुआ है, लेकिन गांवों की वास्तविक जरूरतों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति और सिंचाई नहरों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
भेड़पालकों को ऊन संग्रह केंद्र और दूसरी सुविधाओं का इंतजार
दूरस्थ मोरी क्षेत्र में पशुपालकों की समस्याओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, भेड़पालक लंबे समय से ऊन संग्रह केंद्र स्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस दिशा में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
मोरी निवासी त्रेपन सिंह रावत ने कहा कि पशुपालकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त काम नहीं हुआ है। उन्होंने भेड़पालकों के लिए ऊन संग्रह केंद्र, पशुधन बीमा, निशुल्क टीकाकरण और आधुनिक प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई।
उनका कहना है कि इन सुविधाओं के अभाव में पशुपालकों को अपनी आजीविका से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों में भी नाराजगी का दावा
पुरोला विधानसभा क्षेत्र के व्यापारियों में भी विकास कार्यों को लेकर असंतोष सामने आया है। नौगांव व्यापार मंडल के अध्यक्ष विपिन रमोला का आरोप है कि विधायक की ओर से व्यापारियों के हित में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान व्यापारियों ने विधायक को समर्थन दिया था और विकास से जुड़ी कई उम्मीदें लगाई थीं। हालांकि, उनके अनुसार, उन उम्मीदों पर पर्याप्त काम नहीं हुआ, जिससे व्यापारियों में नाराजगी है।
विधायक बोले- सबसे अधिक खर्च हुई विधायक निधि
वहीं, विधायक दुर्गेश्वर लाल ने अपनी विधानसभा में विधायक निधि से सबसे अधिक धनराशि खर्च होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि योजनाओं और खर्च से जुड़े आंकड़ों में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) कार्यालय स्तर पर कुछ गड़बड़ी हुई है।
विधायक के मुताबिक, शेष धनराशि में से करीब डेढ़ करोड़ रुपये इसी माह के भीतर पूरी तरह खर्च कर दिए जाएंगे।
फिलहाल, विधायक निधि के खर्च के आंकड़ों के साथ-साथ ग्रामीण सड़कों, सिंचाई व्यवस्था, पशुपालकों की सुविधाओं और व्यापारियों की अपेक्षाओं से जुड़े मुद्दे पुरोला विधानसभा में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पर बहस को सामने ला रहे हैं।