

13 किलोमीटर लंबे बाईपास के लिए 47 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत
ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग चारधाम यात्रा के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऋषिकेश में सड़क की सीमित चौड़ाई और वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। इसी समस्या के समाधान के लिए करीब एक दशक से ऋषिकेश बाईपास निर्माण की योजना पर काम किया जा रहा है।
इस 13 किलोमीटर लंबे बाईपास के निर्माण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपी गई है। परियोजना के लिए करीब 47 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता बताई गई है। निर्धारित एलाइनमेंट के अनुसार, निर्माण कार्य से 3,998 पेड़ प्रभावित हो सकते हैं।
1,204 पेड़ों के प्रत्यारोपण की योजना
परियोजना के तहत चिह्नित पेड़ों में से 1,204 का प्रत्यारोपण करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, वन भूमि हस्तांतरण नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने अगस्त में परियोजना स्थल का निरीक्षण करने के बाद प्रभावित होने वाले पेड़ों का दोबारा आकलन करने के निर्देश दिए थे।
अधिकारियों ने कार्यदायी संस्था से कहा कि वास्तविक जरूरत के आधार पर पेड़ कटान की संख्या कम करने के विकल्प तलाशे जाएं। इसके बाद कार्यदायी संस्था भी ऐसे बदलावों पर काम कर रही है, जिनसे निर्माण के दौरान कम से कम पेड़ों को नुकसान पहुंचे।
जैव विविधता पार्क के पास एलाइनमेंट में बदलाव के निर्देश
वन विभाग ने जैव विविधता पार्क के शुरुआती हिस्से में करीब 250 मीटर लंबे उस खंड में भी बदलाव करने को कहा है, जहां सड़क भूमिगत प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की आवाजाही को सुगम बनाए रखने के साथ यातायात व्यवस्था को बेहतर करना है।
परियोजना में एलाइनमेंट और निर्माण योजना की समीक्षा के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि विकास कार्य के दौरान वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रावधान
परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए देहरादून और नरेंद्र नगर वन प्रभागों के लिए 22 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके आवागमन से जुड़ी चुनौतियों को कम करने के प्रयासों को समर्थन देना है।
पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचाने का प्रयास: लोक निर्माण सचिव
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि बाईपास निर्माण के दौरान वृक्षों को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पेड़ों के प्रत्यारोपण का काम भी वन विभाग के सहयोग से किया जाएगा।
परियोजना में अब पेड़ों की संख्या कम करने, प्रत्यारोपण की संभावनाएं बढ़ाने और वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए निर्माण योजना में आवश्यक बदलाव करने पर जोर दिया जा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि संशोधित एलाइनमेंट और पुनर्मूल्यांकन के बाद कितने पेड़ों को कटान से बचाया जा सकेगा और बाईपास निर्माण की योजना को पर्यावरणीय जरूरतों के साथ किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा।