धराली (उत्तरकाशी)। उत्तराखंड के धराली में पिछले वर्ष अगस्त में आई विनाशकारी आपदा के एक साल दो महीने बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार की दिशा में पहल शुरू कर दी है। नवरात्र के पहले दिन रविवार को आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में मंदिर की तलाश के लिए खुदाई शुरू की गई। इससे पहले विधि-विधान के साथ हवन और पूजा-अर्चना की गई।


कल्प केदार मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, इतिहास में चौथी बार मंदिर को खोजने के लिए खुदाई की जा रही है। इससे पहले वर्ष 1926 में खुदाई के दौरान मंदिर के मुख्य हिस्से को मलबे और मिट्टी से बाहर निकाला गया था। करीब एक सदी बाद पिछले वर्ष आई आपदा ने मंदिर को फिर से मलबे में दफन कर दिया।
ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से शुरू की खुदाई
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि फिलहाल ग्रामीणों ने देवता के आदेश के बाद अपने संसाधनों से खुदाई का काम शुरू किया है। मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा मुख्यमंत्री की ओर से भी की गई है। इस संबंध में जल्द ही समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि खुदाई के जरिए प्राचीन मंदिर को खोजकर उसके संरक्षण और पुनर्निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
1803 की आपदा में बह गया था मंदिरों का समूह
कल्प केदार मंदिर समिति के सदस्य संजय पंवार के मुताबिक, बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 1803 में आई आपदा के दौरान बाढ़ में कल्प केदार मंदिर बह गया था। उस समय यहां करीब 204 मंदिरों का समूह होने की बात कही जाती है।
इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई दिए थे। फिर वर्ष 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर का आधा हिस्सा जमीन में दब गया, जबकि अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने खुदाई कर मुख्य मंदिर को बाहर निकाला था।
करीब 25 फीट मलबे में दबा होने का अनुमान
वर्ष 1926 के बाद अब एक बार फिर कल्प केदार मंदिर को खोजने की चुनौती ग्रामीणों के सामने है। पिछले वर्ष अगस्त में धराली में आई विनाशकारी आपदा के दौरान मंदिर करीब 25 फीट मलबे के नीचे दब गया था। इसके बाद से मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार की मांग उठ रही थी।
अब नवरात्र के पहले दिन विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खुदाई शुरू होने से ग्रामीणों को मंदिर के पुनः दर्शन और संरक्षण की उम्मीद जगी है। आने वाले दिनों में खुदाई के दौरान मंदिर की वास्तविक स्थिति और उसके संरचनात्मक स्वरूप को लेकर तस्वीर स्पष्ट होने की संभावना है।