मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में 12 साल बाद आयोजित हो रहे शरदोत्सव की तीसरी शाम हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय लोक गायक कुलदीप शर्मा के नाम रही। टाउन हॉल परिसर में आयोजित स्टार नाइट में उनके पहाड़ी गीतों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर लोक संगीत की धुनों से गूंज उठा। लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति पर युवा ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग भी देर रात तक झूमते नजर आए। दर्शकों की तालियों और उत्साह ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।


गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में कुलदीप शर्मा ने ‘शिल्पा शिमले वालिए’, ‘दरोगा जी’ और ‘कुल्लू मनाली लागा मेला’ जैसे अपने लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। उनकी दमदार आवाज और पारंपरिक पहाड़ी धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान टाउन हॉल परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और कलाकार की प्रस्तुतियों का आनंद लेते दिखाई दिए।
संघर्ष से सफलता तक का सफर किया साझा
स्टार नाइट के दौरान कुलदीप शर्मा ने अपने जीवन के संघर्ष और संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के सफर से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में कई बार असफल होने के कारण एक समय उन्हें लगता था कि शायद वह जीवन में कुछ खास नहीं कर पाएंगे। हालांकि, संगीत के प्रति उनका लगाव और श्रोताओं का प्यार उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय प्रशंसकों को देते हुए कहा कि लोगों का स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। आज हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तराखंड और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में भी उनके गीतों को पसंद किया जाता है। उनके अनुसार, लोक संगीत के प्रति लोगों का बढ़ता जुड़ाव कलाकारों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
तीन हजार से अधिक गीत गाने का दावा
कुलदीप शर्मा ने बताया कि वह अपने संगीत करियर में अब तक तीन हजार से अधिक गीत गा चुके हैं। इनमें से 200 से ज्यादा गीतों को श्रोताओं की ओर से विशेष पसंद मिलने का उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने हिमाचली लोक संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के अपने अनुभव भी साझा किए।
इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश संसद, लंदन में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने से जुड़े अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिमाचली लोक संस्कृति और संगीत को व्यापक पहचान मिलना उनके लिए गर्व की बात है।
इंग्लैंड टूर पर आधारित नया गीत जल्द होगा रिलीज
कार्यक्रम के दौरान गायक ने अपने आगामी संगीत प्रोजेक्ट की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड टूर पर आधारित उनका नया गीत जल्द ही रिलीज किया जाएगा। इस गीत की शूटिंग में उनकी पत्नी बीना शर्मा भी नजर आएंगी।
कुलदीप शर्मा को उम्मीद है कि उनके नए गीत को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिलेगा। उन्होंने अपने दुबई टूर पर आधारित गीत को मिले अच्छे प्रतिसाद का उल्लेख करते हुए नए प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह जताया।
12 साल बाद लौटे शरदोत्सव से बढ़ी मसूरी की सांस्कृतिक रौनक
मसूरी में 12 साल के अंतराल के बाद आयोजित हो रहा शरदोत्सव स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आयोजन में लोक संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलने से शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिल रही है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने कहा कि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी के प्रयासों से लोगों की लंबे समय से चली आ रही शरदोत्सव आयोजित करने की इच्छा पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
उन्होंने बताया कि शरदोत्सव में उत्तराखंड के लोक कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया जा रहा है।
पहली दो शाम भी रहीं लोक कलाकारों के नाम
शरदोत्सव की पहली शाम लोक गायिका बसंती बिष्ट के जागरों और पांडवाज बैंड की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया था। दूसरी शाम उत्तराखंड के कलाकारों गजेंद्र, संगीता, मंजू, मनोज और वीरेंद्र ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। वहीं, तीसरी शाम कुलदीप शर्मा के लोकप्रिय पहाड़ी गीतों ने आयोजन की रौनक को और बढ़ा दिया।
दर्शकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि मसूरी शरदोत्सव पहाड़ी लोक संगीत, पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। लंबे अंतराल के बाद लौटे इस आयोजन से शहर में सांस्कृतिक उत्सव का माहौल बना हुआ है।